सब्जी व अनाज उत्पादन के जरिए आत्मनिर्भर बनी यशोदा दीदी

छिन्दवाड़ा जिले के विकासखंड हर्रई के ग्राम बिछुआ की रहने वाली श्रीमती यशोदा डेहरिया की कहानी संघर्ष और आत्मनिर्भरता की मिसाल है। एक समय था जब उनका परिवार आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहा था, उनके पति श्री कोमल डेहरिया खेती-किसानी करते थे, लेकिन सीमित संसाधनों और पूंजी के अभाव में उनकी कृषि उपज से पर्याप्त लाभ नहीं हो पाता था। परिवार की आमदनी इतनी कम थी कि यशोदा दीदी अपने बच्चों की शिक्षा और घर के दैनिक खर्चों को पूरा करने में असमर्थ थी। सरकारी योजनाओं की जानकारी के अभाव में उन्हें कोई सहायता नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में उन्होंने अपने हालात को बदलने की ठानी और मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित साईंराम आजीविका स्वसहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया।
समूह से जुड़कर मिली नई राह- 17 सितंबर 2018 को यशोदा दीदी ने साईंराम आजीविका स्वसहायता समूह की सदस्यता ग्रहण की। समूह के माध्यम से उन्हें 3 लाख रुपये का बैंक लोन मिला, जिसमें से उन्होंने व्यक्तिगत रूप से 45,000 रुपये का ऋण लेकर कृषि एवं सब्जी उत्पादन कार्य शुरू किया। उन्होंने लहसुन, टमाटर, मिर्च और बैंगन जैसी फसलों की खेती प्रारंभ की और समय पर उन्नत बीज, खाद व उर्वरकों का उपयोग किया। धीरे-धीरे उनके कृषि कार्य ने गति पकड़ी और उन्हें अच्छी आमदनी होने लगी। इस वर्ष उन्होंने अपने परिवार के साथ मिलकर गेहूं, चना और धान की खेती भी की, जिससे उन्हें अधिक मुनाफा प्राप्त हुआ। उनकी उपज को विकासखंड हर्रई के विभिन्न ग्रामों में बेचा गया, जिससे उनकी मासिक आमदनी 18,000 से 20,000 रुपये तक पहुंच गई।
आत्मनिर्भरता की ओर कदम- कृषि कार्य से बढ़ी आमदनी ने यशोदा दीदी और उनके परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त किया। उन्होंने अपनी बचत से और अधिक कृषि भूमि खरीदी और अब प्रतिवर्ष 1 से 2 लाख रुपये की आमदनी प्राप्त कर रही हैं। अब उनके बच्चों की शिक्षा बाधित नहीं होती, घर की आर्थिक स्थिति पहले से कहीं बेहतर हो चुकी है और वे अपने परिवार की सभी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो गई हैं। लाड़ली बहना योजना जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने अपने भविष्य को और भी सुरक्षित बना लिया है।
"खुद को कमजोर समझना भी एक गलती है, संघर्षों की राह ही सफलता की पहली सीढ़ी है।"
यशोदा दीदी: सफलता की नई मिसाल- यशोदा दीदी कहती है कि आज मैं खुद को आत्मनिर्भर और सशक्त महसूस करती हूं। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा। वे मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और इससे जुड़े सभी अधिकारियों का आभार व्यक्त करती हैं जिन्होंने उन्हें यह अवसर दिया और उनकी तरक्की में सहायक बने। यशोदा दीदी की यह सफलता उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने जीवन को बेहतर बनाना चाहती हैं।