नई दिल्ली। बहुसंख्यक मतों के समानांतर ध्रुवीकरण ने भाजपा के लिए असम के साथ ही प. बंगाल में प्रचंड जीत का रास्ता तैयार किया है। इन दोनों ही राज्यों में कांग्रेस के 21 में से 20 विधायक मुस्लिम हैं। तमिलनाडु को भी जोड़ लें, तो कांग्रेस के 26 में से 21 विधायक मुस्लिम हैं।कांग्रेस का अल्पसंख्यक बिरादरी तक सिकुड़ते प्रभाव को असम, प. बंगाल, केरल और तमिलनाडु के नतीजे से समझा जा सकता है। असम में पार्टी के 99 उम्मीदवारों में से, जिन 19 उम्मीदवारों को सफलता मिली, उनमें 18 मुस्लिम  हैं। एक अन्य सीट नाओबाचिया से जॉय प्रकाश दास को जीत हासिल हुई है, पर वह सीट भी मुस्लिम प्रभाव वाली है। इसके अलावा पार्टी की सहयोगी आरजेआरडी की ओर से जीत दर्ज करने वाले दोनों उम्मीदवार भी इसी बिरादरी से हैं। बरसों पहले एक एं के एंटोनी कमेटी ने बता दिया था कि हिंदू तेजी से कांग्रेस से दूर हो रहे हैं परंतु कांग्रेस ने एंटनी कमेटी की रिपोर्ट को कचरे के डब्बे में फेंक दिया और इसके दुष्परिणाम सामने है l क्या कांग्रेस इन विधानसभा चुनाव के परिणामों से कुछ सबक लेगी या फिर पहले की तरह ही इस लाइन पर चलते रहेगी...