भोपाल। तबादले पुलिस सुधारो की बैकबोन माने जाते हैं, जो ना सिर्फ स्थानीय माफियाओं और अपराधियों की मिलीभगत से पुलिस को बचाते हैं बल्कि निश्चित अवधि पर होने वाले तबादले पुलिस को राजनैतिक दबाव से मुक्त कर पेशेवर तरीके से काम करने की खुली छूट भी देते हैं । तबादलों से पुलिसिंग की प्रभावशीलता और कार्य कुशलता में भी वृद्धि होती है। जब कोई पुलिस अधिकारी या पुलिसकर्मी लंबे समय तक एक ही थाने में तैनात होता है तो स्थानीय माफियाओं और अपराधियों से उनके संबंध विकसित हो सकते हैं। निश्चित अवधि पर होने वाले तबादलों से यह सांठगांठ नहीं हो पाती और तो और तबादलों से जवाबदेही और पारदर्शिता के साथ-साथ पुलिस की छवि में भी सुधार होता है । अलग-अलग थानों में काम करने से पुलिस विभिन्न प्रकार की स्थितियों से निपटने में सक्षम बनती है वहीं तबादलों से कार्यस्थल के साथ-साथ वातावरण में भी बदलाव मिलता है। मध्यप्रदेश पुलिस के मुखिया डीजीपी कैलाश मकवाणा प्रदेश को स्मार्ट पुलिसिंग देने की दिशा में पूरी जिम्मेदारी के साथ काम कर रहे हैं।                     SMART - संवेदनशील (sensitive),आधुनिक (Modern), सतर्क और जिम्मेदार(Alert and Accountable), विश्वसनीय (Reliable), तकनीकी क्षमता युक्त एवं प्रशिक्षित (Tecno-Savy and hained)  । मध्यप्रदेश पुलिस ने तबादलों के लिए जो क्राइटेरिया बनाया है उसकी हर तरफ सराहना हो रही है। यह कहने में कतई संकोच नहीं है कि ऐसा क्राइटेरिया हिंदुस्तान के किसी भी प्रदेश में कभी नहीं बनाया गया । तबादलों के लिए बनाया गया यह क्राइटेरिया बेहतर पुलिसिंग की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। जरा सोचिए डाउन टू अर्थ विभागीय स्तर पर कितनी एक्सरसाइज की गई होगी तब जाकर यह क्राइटेरिया बनाया गया है और यह क्राइटेरिया ऐसा है कि इससे बचने की कहीं भी कोई गुंजाइश भी नहीं छोड़ी गई है । वास्तव में ऐसे फैसले ही नजीर बनते हैं । मध्यप्रदेश पुलिस महकमें में पारदर्शिता लाने और थानों में वर्षों से जमें पुलिस अधिकारियों और पुलिस कर्मियों का रसूख खत्म करने के लिए यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। जिसकी गूंज दूर-दूर तक सुनाई दे रही है। अब एक ही थाने में अधिकतम चार से पांच साल तक ही पोस्टिंग हो सकेगी । एक ही पद पर उसी थाने में दोबारा पोस्टिंग नहीं हो सकेगी । एक ही थाने में अलग पद पर पोस्टिंग के लिए कम से कम तीन  साल का अंतराल होना जरूरी है वहीं एक ही संभाग में पोस्टिंग दस साल से अधिक नहीं होनी चाहिए। अब अटैचमेंट की अवधि भी सेवा काल में ही गिनी जाएगी । स्वयं डीजीपी कैलाश मकवाणा की मानें तो तबादलों के लिए क्राइटेरिया पुलिस व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ निष्पक्षता लाने में कारगर साबित होगा । लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की अदला-बदली से कार्यकुशलता के साथ-साथ जनता में विश्वास भी बढ़ता है । हमारा प्रयास यही है कि प्रशासनिक दृष्टि से सही जगह , सही व्यक्ति ही बैठे ताकि वह सही तरीके से अपने कर्तव्य का पालन कर सके । पुलिस तंत्र ऐसा होना चाहिए कि जिससे आमजन नजदीकी महसूस करें ,भले लोगों में पुलिस का भय ना हो इसके लिए ही ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है। तबादलों के लिए बनाया गया क्राइटेरिया ही नहीं बल्कि नशे के खिलाफ अभियान हो ,साइबर सुरक्षा, खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन हो, मुस्कान अभियान हो जहां देखो वहीं सुधार की मंशा स्पष्ट नजर आती है । डीजीपी कैलाश मकवाणा की पूरी की पूरी कार्यशैली ही सुरक्षित, भरोसेमंद और प्रभावी पुलिस व्यवस्था देने के लिए प्रतिबद्ध और समर्पित नजर आती है।