सिर्फ काम करने वाले ही नहीं बल्कि काम करके परिणाम देने वाले मंत्री के रूप में अपनी अलग पहचान रखते हैं स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह
भोपाल। वल्लभ भवन , मंत्रालय में स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह छाए हुए हैं । इनसे मिलने वालों की भारी भरकम भीड़ और उनकी कार्यशैली की चर्चा हर तरफ हो रही है। मंत्रालय में इनकी सहज उपलब्धता के कारण ही आमजन और कार्यकर्ताओं में यह नेगेटिव सेट हो गया है कि मंत्रालय में कोई मंत्री मिले या ना मिले लेकिन स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह तो मिल ही जाते हैं । वह इसी तरह प्रभार के जिलों में भी सक्रियता दिखाते हैं और सांसद के रूप में भी इनकी प्रभावी उपस्थिति और सक्रियता के चलते राष्ट्रीय राजनीति के बड़े नेता भी उनके मुरीद हैं और रही बात अनुभव की तो एक बार उनके विभाग के ही एक अफसर हाईकोर्ट से संबंधित एक फाइल लेकर उनके पास आए और मंत्री जी के समक्ष रख दी, मंत्री जी ने फाइल के पन्ने पलटे और अधिकारी महोदय की न सिर्फ क्लास ही ले डाली बल्कि उन्हें नसीहत भी दे दी। मंत्री जी ने उनको दो टूक कह दिया कि जब यह काम मंत्रालय स्तर से ही हो सकता था तो फिर उस व्यक्ति को हाईकोर्ट क्यों जाना पड़ा ...? यदि यह काम मंत्रालय स्तर पर ही हो जाता तो ना तो विभाग को अनावश्यक एक्सरसाइज करनी पड़ती और ना ही संबंधित को हाईकोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते मंत्री जी की नसीहत पर अधिकारी भी समझ गए कि रांग नंबर लग गया है । यह तो एक छोटा सा उदाहरण है । सियासी जिंदगी में अपराजेय रहे स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह स्कूल शिक्षा और परिवहन विभाग में नवाचार के माध्यम से नए आयाम स्थापित कर रहे हैं । जिनके परिणाम भी अब सामने आने लगे हैं l मध्यप्रदेश में बच्चों को दी जा रही किताबों की जरा क्वालिटी तो देखिए इसमें कहीं कोई संकोच नहीं है कि हिंदुस्तान के किसी भी राज्य में ऐसी उच्च गुणवत्ता युक्त किताबें नहीं चलती होगी। सिर्फ किताबों की गुणवत्ता ही नहीं उनके कंटेंट और चित्रों की क्वालिटी भी देखिए यह सब एक दिन का काम नहीं है लेकिन उनके ठोस इरादों के चलते यह संभव हो पाया है । स्कूल शिक्षा को डिजिटल करने के लक्ष्य की दिशा में वह तेजी से काम कर रहे हैं । अब सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों से भी अच्छी सुविधाएं मिल रही हैं। सांदीपनि विद्यालय आज उच्चस्तरीय शिक्षा प्रदान करने के लिए जाने जा रहे हैं । संदीपनी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण एवं नवाचार आधारित शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित कर रहे हैं । सांदीपनी विद्यालयों में नियमित एकेडमिक संवाद ,शिक्षक समीक्षा बैठके ,योजनाबद्ध शैक्षणिक गतिविधियां विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए संचालित की जाती हैं और इनके माध्यम से शिक्षण गुणवत्ता, एकेडमिक संवाद सीखने के वातावरण को और अधिक बेहतर परिणाम उन्मुख बनाया गया है । सांदीपनि विद्यालय के ही एक छात्र मयंक मात्रे का चयन अभी हाल ही में नासा में शैक्षणिक भ्रमण के लिए हुआ है ,यह मध्य प्रदेश के शैक्षणिक जगत के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। छोटे-छोटे शासकीय विद्यालयों में भी अब परिवर्तन की लहर नजर आने लगी है । स्कूल शिक्षा मंत्री के प्रयास सफल होते प्रतीत होते हैं। बात करें परिवहन विभाग की परिवहन विभाग तेजी से नवाचार करने के लिए अपनी एक अलग पहचान बना रहा है । जहां एक ओर ट्रांसपोर्टर के लिए हेल्पलाइन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों को सुगम बसो के माध्यम से जोड़ने की कवायद तेज हो चली है। बहुत जल्द ही मध्यप्रदेश में लोक परिवहन को सुगम बनाने के लिए परिवहन सेवा योजना का प्रारंभ की जाएगी । आश्चर्यजनक बात तो यह भी है कि पीएम राहत और राहवीर योजना में मध्यप्रदेश पूरे देश में पहले स्थान पर है । आमजन के लिए सुरक्षित ,सुगम और सुलभ परिवहन उपलब्ध कराना सरकार का लक्ष्य है वहीं परिवहन चौकियों को भी एकीकृत करने के प्रयास तेजी से हो चले हैं । मध्यप्रदेश में यदि 2025-26 की बात करें तो परिवहन विभाग ने दिए गए लक्ष्य से 111.6% अधिक राजस्व अर्जित किया है । अब ड्राइविंग लाइसेंस और पंजीयन प्रमाण पत्र भी डिजिटल फॉर्म में उपलब्ध हो रहे हैं वहीं मध्य प्रदेश राज्य सड़क सुरक्षा सचिवालय भी आकर ले रहा है । बेदाग, निर्विवाद और अपराजेय रहे स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री का पालिटिकल ट्रैक रिकार्ड भी गजब का है । छात्र जीवन से ही वे राजनीति में आए बरमान कॉलेज के अध्यक्ष बने इसके बाद फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा , 1994 में वे नरसिंहपुर जिले की चांवरपाठा जनपद के अध्यक्ष रहे और जनपदअध्यक्ष के रूप में उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों की परिणीति ही थी कि उन्हें 2007 में पहली बार तेंदूखेड़ा विधानसभा से टिकट मिला और वह चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे l 2009, 2014 और 2019 में वे होशंगाबाद नरसिंहपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे हैं, 2019 में वे मध्यप्रदेश में सर्वाधिक वोटो से जीतने वाले सांसद थे और देश में सर्वाधिक मतों से जीतने वाले टॉप टेन सांसदों में भी उनका नाम शुमार था । उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 5.50 लाख से भी अधिक मतों से पराजित किया था । पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें कठिन समझी जाने वाली गाडरवारा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारा वहां उनकी समाज के गिने-चुने लोग ही थे परंतु उनका विकासशील चेहरा लोगों के दिलों दिमाग में फिट था यही वजह रही है कि वह तमाम विरोधों और प्रतिरोधों के बीच भी आधे लाख से भी अधिक मतों से विधानसभा चुनाव जीते। सांसद के रूप में भी उन्होंने लोकसभा क्षेत्र के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक समान भाव से विकास कार्य कराए । किसी भी विधानसभा क्षेत्र के साथ उन्होंने अन्याय नहीं होने दिया। वे सांसद के रूप में भी अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रहे । स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह बतौर सांसद कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री संगठन, राष्ट्रमंडल संसदीय संघ में भारत की ओर से प्रतिनिधि नामांकित हुए , लोकसभा की रसायन एवं उर्वरक संबंधी स्थाई समिति, सरकारी उपक्रमों संबंधी स्थाई समिति, रेल विभाग की परामर्शदात्री समिति ,भारत सरकार की अंतरिक्ष विभाग की संयुक्त सलाहकार समिति के सदस्य के रूप में भी उन्हें काम करने का अवसर मिला । उनके काम करने का अंदाज ही कुछ ऐसा था कि वह केंद्रीय नेतृत्व की आंखों के तारा बन गए, उनके सांसद रहते स्वयं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक मीटिंग के दौरान उपस्थित सांसदों को संबोधित करते हुए कहा था कि उदय से सीखो कि लोग उनको कितना पसंद करते हैं । इनकी जनता से कनेक्टिविटी और अप्रोच कितनी अच्छी है। आज मध्यप्रदेश सरकार में राव उदय प्रताप सिंह स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री हैं लेकिन उनकी सहज उपलब्धता और सरल व्यवहार के चलते कार्यकर्ता और आमजन उनके पास दौडे़ चले आते हैं, उनके निवास पर भी मिलने वालों का मजमा लगा रहता है । जो उनकी कार्यशैली को दर्शाता है। स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री राम उदय प्रताप सिंह के विधायक के रूप में, सांसद के रूप में और स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री के रूप में कार्यकाल को देखकर ऐसा लगता है कि वे सिर्फ काम करने वाले ही नहीं बल्कि काम करके परिणाम देने वाले जननेता हैं।


