सनातन परंपराओं में निर्जला एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना उचित नहीं माना जाता है। यह तिथि भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित होती है और तुलसी माता को भी विशेष सम्मान दिया जाता है। इसी कारण पूजा में चढ़ाने के लिए तुलसी दल एक दिन पहले ही एकत्र कर लेने की परंपरा प्रचलित है। भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व है और इसके बिना पूजा को अधूरा माना जाता है। यदि किसी कारणवश एकादशी के दिन तुलसी दल लेना आवश्यक हो जाए, तो पहले तुलसी माता को प्रणाम कर उनसे क्षमा प्रार्थना करने की मान्यता है। मान्यता है कि नियमों का पालन करते हुए श्रद्धापूर्वक की गई विष्णु और तुलसी पूजा से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।