गुना कलेक्टर श्री किशोर कन्याल के दिशा-निर्देशन में जिले में उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखाई देने लगा है। बमोरी विकासखंड का भटोदिया गांव आज आधुनिक एवं वैज्ञानिक सब्जी उत्पादन का ऐसा मॉडल बन गया है, जिसे लोग "गुना का मिनी इजराइल" कहने लगे हैं। महज 10 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव ने कुछ ही वर्षों में उद्यानिकी के क्षेत्र में ऐसी पहचान बनाई है कि अब यह अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया है।

      गांव में कुल 110 किसान परिवार हैं, जिनमें से 97 किसान वर्षा ऋतु में उद्यानिकी फसलों के अंतर्गत सब्जियों की खेती कर रहे हैं। लगभग सभी किसान ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग, स्टैकिंग, फर्टिगेशन एवं उन्नत हाइब्रिड बीजों का उपयोग कर वैज्ञानिक तरीके से खेती कर रहे हैं। यहां की ढालू एवं मुरमी (रेतीली) भूमि को किसानों ने आधुनिक तकनीकों की मदद से अधिक उत्पादन वाली खेती में बदल दिया है।

      भटोदिया में मुख्य रूप से कद्दूबर्गीय सब्जियां जैसे तोरई, खीरा, करेला, लौकी तथा अन्य बेल वाली सब्जियों का उत्पादन किया जाता है। यहां उत्पादित सब्जियां केवल गुना की मंडियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्वालियर, मथुरा और दिल्ली जैसे बड़े बाजारों में भी पहुंच रही हैं।

      ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी रामकुमार दिवाकर ने बताया कि कुछ वर्ष पहले किसान पारंपरिक तरीके से खेती करते थे, जिससे उत्पादन कम और लागत अधिक आती थी। उद्यानिकी विभाग ने गांव में लगातार प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन एवं योजनाओं का लाभ पहुंचाया। विभाग द्वारा ड्रिप सिंचाई एवं मल्चिंग पर 50 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया गया, जिससे किसानों की लागत कम हुई और आधुनिक तकनीकों को अपनाने का उत्साह बढ़ा। परिणामस्वरूप किसानों का उत्पादन दो से तीन गुना तक बढ़ गया।

      वैज्ञानिक तकनीकों का प्रभाव किसानों की आय पर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। पहले जहां परंपरागत खेती से किसानों को प्रति एकड़ 40 से 50 हजार रुपये तक का शुद्ध लाभ मिलता था, वहीं अब आधुनिक सब्जी उत्पादन से प्रति एकड़ 3 से 4 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा प्राप्त हो रहा है। ड्रिप सिंचाई से पानी की बचत के साथ जल में घुलनशील उर्वरकों को फर्टिगेशन के माध्यम से सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। मल्चिंग से नमी संरक्षण एवं खरपतवार नियंत्रण होता है, जबकि स्टैकिंग तकनीक से बेल वाली फसलों को सहारा मिलने से गुणवत्तापूर्ण एवं अधिक उत्पादन प्राप्त हो रहा है।

      भटोदिया की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि  8 से 10 वर्ष पहले जहां गांव में मात्र 3 हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जी उत्पादन होता था, वहीं आज यह बढ़कर 97 हेक्टेयर तक पहुंच चुका है। इससे गांव की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है और किसानों के जीवन स्तर में भी सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है।

      उप संचालक उद्यान के.पी.एस. किरार ने बताया कि उद्यानिकी विभाग जिले में क्लस्टर आधारित खेती को विशेष रूप से प्रोत्साहित कर रहा है। विभाग का उद्देश्य ऐसे गांव विकसित करना है, जहां अधिक से अधिक किसान एक ही क्षेत्र में उच्च मूल्य वाली उद्यानिकी फसलों की वैज्ञानिक खेती करें। इससे तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, विभागीय योजनाओं का लाभ और विपणन व्यवस्था अधिक प्रभावी बनती है। भटोदिया इसका उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां किसानों ने सामूहिक रूप से आधुनिक तकनीकों को अपनाकर खेती को अत्यधिक लाभकारी बनाया है। आने वाले समय में जिले के अन्य गांवों में भी इसी मॉडल को विकसित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किसान उद्यानिकी फसलों से जुड़कर अपनी आय बढ़ा सकें।

      भटोदिया आज यह सिद्ध कर चुका है कि यदि किसानों को समय पर तकनीकी मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीक और शासकीय योजनाओं का लाभ मिले तो सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण भूमि पर भी खेती को अत्यधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। यही कारण है कि यह गांव आज पूरे गुना जिले में उद्यानिकी आधारित समृद्धि और वैज्ञानिक खेती का प्रेरणादायी मॉडल बनकर उभरा है।