झाबुआ l जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन कार्यक्रम का आयोजन मंगलवार को आजीविका भवन, झाबुआ में महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में जल संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में किए गए कार्यों की उपलब्धियों के साथ जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया गया।

 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि पंचायत एवं ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिवर्ष जल संवर्धन के कार्य किए जाते हैं, क्योंकि पानी जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में जल स्रोत सूख जाते हैं और यह समय उनके संरक्षण एवं पुनर्जीवन का अवसर प्रदान करता है। सरकार का सदैव प्रयास रहा है कि जनसहयोग और जनभागीदारी से अधिक से अधिक कार्य संपन्न किए जाएं।

 

उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में सदियों से "हलमा" जैसी परंपराओं के माध्यम से सामूहिक सहयोग की संस्कृति रही है। यह परंपरा हमारे व्यवहार और जीवनशैली का हिस्सा थी, लेकिन धीरे-धीरे व्यक्तिगत निर्भरता बढ़ने के कारण सामूहिक भागीदारी की भावना कमजोर हुई है। इस सोच को बदलने की आवश्यकता है। हमें अपनी परंपराओं को पुनः अपनाना होगा और जनहित के कार्यों में सामूहिक जिम्मेदारी निभाने की आदत विकसित करनी होगी। 

 

सुश्री भूरिया ने कहा कि प्रधानमंत्री भी जनभागीदारी आधारित विकास पर विशेष बल देते हैं। तालाबों की गाद अत्यंत उपजाऊ होती है और इसका उपयोग कृषि उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि जल संरचनाओं का संरक्षण एवं उपयोग सभी नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। जिले में जल संरक्षण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा चक्र प्रभावित हो रहा है, जो प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का संकेत है। उन्होंने कहा कि जिले और गांवों को पुनः हराभरा बनाने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों पर बल देते हैं।

 

इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने कहा कि "जल है तो कल है" केवल एक नारा नहीं, बल्कि वर्तमान समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में पानी की मांग और अधिक बढ़ने वाली है तथा जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए जल संरक्षण के लिए छोटे-छोटे प्रयासों को जन आंदोलन का स्वरूप देना होगा। उन्होंने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि जल संरक्षण के कार्यों में जनसहयोग के लिए आगे आएं। आगामी वर्षों में वाटरशेड डेवलपमेंट प्लानिंग एवं व्यक्तिगत जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। 

कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष श्री भानु भूरिया ने कहा कि विगत तीन माह तक संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान ने जल के उपयोग, महत्व एवं संरक्षण के प्रति व्यापक जनजागरूकता पैदा की है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मत्स्य पालन, आजीविका संवर्धन एवं समग्र विकास का आधार है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जल संरचनाओं के निर्माण एवं पुनरुद्धार का व्यापक कार्य हुआ है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अगले वर्ष भी जनभागीदारी एवं जनसहयोग से इस अभियान को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा।

 

मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन

कार्यक्रम के दौरान महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन अवसर पर प्रदेशवासियों के नाम जारी संदेश का वाचन भी किया गया।

 

झाबुआ में जल गंगा संवर्धन अभियान की उल्लेखनीय उपलब्धियां, 17 विभागों ने मिलकर किया कार्य

 

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री जितेन्द्र सिंह चौहान ने पॉवर पॉइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से जिले में संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 की उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अभियान का शुभारंभ 19 मार्च 2026 को ग्राम पंचायत चारोलीपाड़ा, जनपद पंचायत झाबुआ में मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया द्वारा तालाब में गाद निकासी हेतु श्रमदान कर किया गया था। इस अभियान में कुल 17 विभागों ने सहभागिता की, जिसमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग नोडल विभाग रहा।

 

उन्होंने बताया कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में कुल 7420 कार्य स्वीकृत किए गए, जिनमें से 6267 कार्य पूर्ण तथा 1153 कार्य प्रगतिरत हैं। अभियान के तहत 1233 फार्म पॉन्ड स्वीकृत किए गए, जिनमें 908 पूर्ण एवं 325 प्रगतिरत हैं, जिससे लगभग 605 हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र में वृद्धि होगी। 4071 डगवेल रिचार्ज पिट में से 3921 पूर्ण किए जा चुके हैं। 14 अमृत सरोवरों में से 8 पूर्ण एवं 6 प्रगतिरत हैं, जिनसे लगभग 60 हजार घनमीटर जल संरक्षण क्षमता बढ़ेगी। 1368 जल संरक्षण एवं रिचार्ज कार्यों में से 1048 पूर्ण तथा 320 प्रगतिरत हैं, जिनसे 52.40 लाख घनमीटर जल संरक्षण क्षमता विकसित होगी।

 

उन्होंने बताया कि सिंचाई अधोसंरचना के सभी 9 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं, जिनसे 90 हजार घनमीटर जल संग्रहण क्षमता में वृद्धि होगी। पीएमकेएसवाई के दोनों स्वीकृत कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं। वाटरशेड संबंधी 81 कार्यों में से 76 पूर्ण एवं 5 प्रगतिरत हैं, जबकि जल संरचनाओं के 50 मरम्मत एवं रखरखाव कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। वीबी-जी-राम-जी अंतर्गत 210 कार्यों में से 155 पूर्ण तथा गैप फिलिंग इन प्लांटेशन के 382 कार्यों में से 90 पूर्ण किए गए हैं।

 

उन्होंने बताया कि जल संचय जनभागीदारी 2.0 पोर्टल पर निर्धारित 6826 फोटो अपलोड के लक्ष्य के विरुद्ध 7504 फोटो अपलोड कर 110 प्रतिशत उपलब्धि प्राप्त की गई। जनभागीदारी से 135 तालाबों में गाद निकासी कार्य किए गए, जिनसे प्राप्त 5728 घनमीटर मिट्टी का उपयोग किसानों द्वारा अपने खेतों में किया गया तथा तालाबों की जल संग्रहण क्षमता में लगभग 57.28 लाख घनमीटर की वृद्धि होगी।