प्राकृतिक खेती, आधुनिक तकनीक और नवाचार को बढ़ावा दें
गुना कलेक्टर श्री किशोर कुमार कन्याल ने गुरुवार को कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य एवं पशुपालन विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित कर विभागीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों की विस्तार से समीक्षा की तथा अधिकारियों को प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में नवाचार, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर किसानों की आय बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयास किए जाएं।
मिट्टी परीक्षण के आधार पर खेती को मिले नई दिशा, प्राकृतिक खेती को दें बढ़ावा
कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर श्री कन्याल ने जिले की मिट्टी की प्रकृति एवं बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उप संचालक कृषि श्री संजीव शर्मा ने बताया कि जिले में मध्यम, दोमट एवं काली मिट्टी पाई जाती है। कलेक्टर ने स्वाइल हेल्थ कार्ड की प्रगति की जानकारी लेते हुए निर्देश दिए कि प्रत्येक किसान की भूमि का वैज्ञानिक परीक्षण कर उसे यह जानकारी उपलब्ध कराई जाए कि उसकी भूमि किस फसल के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है, ताकि उत्पादन एवं आय दोनों में वृद्धि हो सके। उन्होंने कृषि फसल पैटर्न में आवश्यक परिवर्तन करने तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। विभाग द्वारा बताया गया कि जल उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए किसानों को उड़द, मूंग, तिल एवं मक्का जैसी कम पानी वाली फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
पॉलीहाउस, थाई पिंक अमरूद एवं मालाबार नीम के विस्तार की बने कार्ययोजना
उद्यानिकी विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर श्री कन्याल ने पॉलीहाउस, थाई पिंक अमरूद एवं सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने जिले में मालाबार नीम के रोपण को प्रोत्साहित करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने तथा किसानों के लिए कार्यशालाओं का आयोजन करने को कहा, जिससे किसान नई तकनीकों एवं लाभकारी फसलों की जानकारी प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि नवाचार और नए विचार किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उप संचालक उद्यानिकी श्री के.पी.एस. किरार ने बताया कि जिले के किसान पॉलीहाउस एवं थाई पिंक अमरूद की खेती में बढ़-चढ़कर भागीदारी कर रहे हैं तथा रात्रि चौपालों के माध्यम से भी किसानों को योजनाओं एवं आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जा रही है।
दुग्ध समृद्धि अभियान, क्षीरधारा योजना एवं केज कल्चर से बढ़ेगी किसानों और मत्स्य पालकों की आय
पशुपालन विभाग की समीक्षा करते हुए कलेक्टर श्री कन्याल ने अधिकारियों को नियमित फील्ड भ्रमण करने तथा कार्य में लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उप संचालक पशुपालन श्री समर सिंह राठौर ने बताया कि दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान के अंतर्गत अब तक 18हजार 808पशुपालकों से संपर्क कर उन्हें पशु स्वास्थ्य, पोषण एवं नस्ल सुधार संबंधी जानकारी प्रदान की गई है। साथ ही क्षीरधारा योजना के प्रथम चरण में जिले के 44गांवों का चयन कर नस्ल सुधार, टैगिंग, चारा विकास एवं गोबर के मूल्य संवर्धन संबंधी कार्य किए जा रहे हैं।
बैठक में मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने मत्स्य उत्पादन बढ़ाने एवं आधुनिक तकनीकों के उपयोग के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए। प्र. सहायक संचालक मत्स्य श्री राजेश शर्मा ने बताया कि जिले में 521 तालाबों एवं 43 जलाशयों में मत्स्य पालन किया जा रहा है। मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 के अंतर्गत गोपीकृष्ण सागर जलाशय में 705 हेक्टेयर क्षेत्र में 792 केज स्थापना के लिए आवेदन प्राप्त हुए हैं तथा अनुमोदन की प्रक्रिया प्रचलन में है। बैठक में केज कल्चर को मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बताते हुए जानकारी दी गई कि एक केज की स्थापना पर लगभग 3 लाख रुपये का व्यय आता है तथा प्रथम वर्ष के बाद प्रति केज लगभग 1.80 लाख रुपये का वार्षिक शुद्ध लाभ प्राप्त किया जा सकता है। कलेक्टर ने मत्स्य विभाग की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए अधिकाधिक हितग्राहियों को लाभान्वित करने के निर्देश दिए।


