विदेशों में अधिकारी भारत की छवि, गरिमा और विश्वास के प्रतिनिधि होते हैं - डीजीपी श्री मकवाणा
भोपाल। पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा से आज भारतीय विदेश सेवा (IFS) के अधिकारियों ने सौजन्य भेंट की। यह भेंट आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित राज्य प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत संपन्न हुई, जिसमें प्रशासनिक अनुभवों के आदान-प्रदान, आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विषयों तथा बहु-सेवा समन्वय को सुदृढ़ करने संबंधी चर्चा की गई।
इस अवसर पर कोर्स डायरेक्टर श्रीमती अनुपमा रावत सहित वर्ष 2014, 2015 एवं 2025 बैच के भारतीय विदेश सेवा अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों का परिचय पीएसओ टू डीजीपी डॉ. विनीत कपूर द्वारा कराया गया। इस अवसर पर एसओ टू डीजीपी श्री मलय जैन भी उपस्थित रहे।
डीजीपी श्री मकवाणा ने सभी अधिकारियों का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय विदेश सेवा देश की अत्यंत महत्वपूर्ण सेवा है, क्योंकि विदेशों में पदस्थ अधिकारी केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं निभाते, बल्कि भारत की छवि, प्रतिष्ठा और विश्वास का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। उन्होंने कहा कि इस सेवा में उच्चतम आचरण, संवेदनशीलता, अनुशासन, धैर्य एवं त्वरित निर्णय क्षमता अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जब वे सेवा में आए थे, तब पुलिस व्यवस्था आज की तुलना में काफी भिन्न थी। संसाधन सीमित थे और तकनीकी सुविधाएँ कम थीं, किन्तु पुलिस आधुनिकीकरण योजना के अंतर्गत केंद्र एवं राज्य सरकार के सहयोग से व्यापक सुधार हुए हैं। पुलिस हाउसिंग, प्रशासनिक भवन, आधुनिक संचार प्रणाली, वाहन, नियंत्रण कक्ष, डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन (ई-ऑफिस), ईएचआरएमएस, तथा CCTNS जैसे सिस्टम ने पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया है। इसके अतिरिक्त डीजीपी श्री मकवाणा ने मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संचालित जनजागरूकता अभियान, ‘’नशे से दूरी है जरूरी’’ तथा ‘’सेफ क्लिक’’ अभियान का उल्लेख किया। उन्होंने पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं तनाव प्रबंधन हेतु हार्टफुलनेस संस्थान के माध्यम से आयोजित ध्यान सत्रों की भी जानकारी दी।
डीजीपी श्री मकवाणा ने कहा कि वर्तमान समय में नारकोटिक्स तथा साइबर अपराध जैसी चुनौतियाँ प्रमुख हैं। विशेष रूप से साइबर फ्रॉड के मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए एक लाख रुपये से अधिक के मामलों में अनिवार्य ई-जीरो FIR दर्ज करने की व्यवस्था लागू की गई है।
पुलिस महानिदेशक ने अपने 38 वर्षों के अनुभव साझा करते हुए कहा कि पुलिस सेवा की वास्तविक सीख जमीनी अनुभवों से मिलती है। पुलिस के समक्ष चुनौतियों के प्रश्न के उत्तर में डीजीपी श्री मकवाणा ने कहा कि अपराधों की बदलती प्रकृति के बीच पुलिस को सदैव सतर्क एवं त्वरित कार्रवाई के लिए तैयार रहना होता है। उन्होंने हाल ही में सिंगरौली बैंक डकैती में त्वरित प्रतिक्रिया एवं तत्काल घटनास्थल पहुंचकर की गई कार्रवाई का उल्लेख किया। साथ ही पूर्व में चड्डी बनियान गैंग के विरुद्ध की गई कार्यवाही के अनुभव साझा करते हुए टीमवर्क, सूचनातंत्र एवं समन्वय को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि नियमित जनसुनवाई से आमजन की समस्याओं का प्रभावी निराकरण होता है तथा मध्यप्रदेश में सुरक्षित वातावरण और सुशासन की व्यवस्था है, जहाँ अधिकारियों से संवाद एवं मुलाकात सहज रूप से संभव है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को ऐसे किसी भी कार्य से बचना चाहिए जिससे सेवा की छवि प्रभावित हो। विदेश सेवा के अधिकारी भारत के प्रतिनिधि होते हैं, इसलिए उन्हें अधिक सतर्कता, गरिमा और जिम्मेदारी के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को बिना रुके, बिना थके समर्पण भाव से कार्य करने की प्रेरणा दी।
भारतीय विदेश सेवा अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश में राज्य प्रशिक्षण के दौरान उन्हें प्रशासन, उद्योग, पर्यटन, कानून-व्यवस्था तथा सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर मिला। उन्होंने महाकाल लोक एवं महाकालेश्वर मंदिर दर्शन, विदिशा-उदयगिरि गुफाएँ भ्रमण तथा विभिन्न विभागों के साथ संवाद को अत्यंत उपयोगी बताया।
अधिकारियों ने Singapore, France, Myanmar, Japan, Spain, Indonesia तथा New York सहित विभिन्न देशों में कार्य अनुभव साझा करते हुए बताया कि प्रत्येक देश की प्रशासनिक व्यवस्था, नागरिक अनुशासन, सुरक्षा प्रणाली और कानून-व्यवस्था की चुनौतियाँ अलग होती हैं। विदेशों में भारतीय दूतावासों की भूमिका केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, सहायता और विश्वास बनाए रखने में भी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
यह संवाद सत्र प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक, ज्ञानवर्धक एवं अनुभव समृद्ध रहा।


