अलीराजपुर l भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक डॉ.आर.के.सिंह ने कृषि विज्ञान केन्द्र आलीराजपुर का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रमुख डॉ.आर.के.यादव एवं अन्य वैज्ञानिकों के साथ जिले के ग्राम साकड़ी का दौरा किया। जहां उन्होंने किसानों से मोटे एवं अन्य फसलों के उत्पादन एवं उनमें आने वाली समस्याओं के बारे में विस्तार से चर्चा की एवं आवश्यक सुझाव देने के साथ-साथ तकनीकी निर्देश भी दिये। इस दौरान उन्होंने मोटे अनाज से बनाये गये व्यंजन के बारे में चर्चा की एवं उनमें ओर कैसे सुधार किया जा सकता हैइस पर मार्गदर्शन दिया। अपने भ्रमण के दौरान डॉ.आर.के.सिंह ने कृषि विज्ञान केन्द्र की विभिन्न प्रदर्शन इकाईयों जैसे-गिर गाय पालनबकरी पालनकड़कनाथ मुर्गी पालनशेड-नेट हाउसफसल संग्रहालयऔषधीय पौधों का बगीचाआमअमरूदचीकूसीताफलपेशन फ्रुटड्रेगन फ्रूट का बगीचासब्जियों की मल्चिंग ड्रिप द्वारा की जा रही खेतीचना एवं मसूर के प्रजनक बीज उत्पादन के प्रक्षेत्रभंडार गृहकेंचुआं खाद उत्पादन इकाईतालाब आदि इकाईयों का भ्रमण कर इकाईयों के अच्छे व्यवस्थापन की भूरि-भूरि सराहना की। उन्होंने तालाब के किनारे अच्छे लाभप्रद पौधों का रोपण कर उसमें टूरिज्म की व्यवस्था करने के निर्देश दिये।

      इस दौरान कृषि विज्ञान केन्द्र में कृषकों हेतु कृषक संगोष्‍ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में लगभग 60 कृषक उपस्थित थे। डॉ.सिंह ने संगोष्ठी के प्रारम्भ में कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रमुख डॉ.आर.के.यादव ने जिले की भौगोलिक एवं फसलों से आच्छादित क्षेत्र आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही जिले की साक्षरता दर कम होने से उन्नत कृषि तकनीकी के प्रचार प्रसार में आने वाली कठिनाईयों के बारे में अवगत कराया।

भारत सरकार की योजनाओं पर कृषकों को दी गई जानकारी - डॉ.आर.के.सिंह ने अपने उद्बोधन में मध्यप्रदेश एवं भारत सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर वर्षा जल का संरक्षण कर रबी मौसम की फसलों के लिए जल का उपयोग करना, साथ ही ड्रिप मल्चिंग एवं स्प्रिंकलर पद्धति को अपनाकर सब्जी उत्पादन करना, सब्जियों के बीज वितरित कर किसान के खेतों पर प्रदर्शन लगाना एवं उसमें रिजबेड पद्धति के साथ मल्चिंग लगाकर खेती की उन्नत तकनीकी का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने फसलों के उत्पादन एवं नवीन उद्योग लगाने का सुझाव भी दिया। फल वृक्षों को खेतों के मेड़ पर लगाने से अतिरिक्त आय प्राप्त करने  एवं नवीन योजनाओं पर सरकार द्वारा जो कार्य किये रहे हैं, इसकी जानकारी दी। डॉ.सिंह द्वारा आदर्श ग्राम योजनान्तर्गत तिलहन उत्पादन की उन्नत तकनीकी के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। तिलहन फसल के रूप में सरसों की प्रजाति रूकमणी का उत्पादन कर बाजार में विक्रय से पूर्व इस उन्नत किस्म के बीज को संरक्षित कर अगले 3 वर्षों तक उस बीज का उपयोग करने हेतु प्रेरित किया। संगोष्ठी में किसान कल्याण एवं कृषि विभाग के उप संचालक  श्री एस.एस.चौहान, परियोजना संचालक आत्मा श्री डी.एस.मोर्य, पशुपालन विभाग से डॉ. आर.एल.बेरवा, डी.एस.सी संस्था से श्री मनीष गिरधाणी, श्री विजेन्द्र पंवार एवं कृषि विज्ञान केन्द्र के  वैज्ञानिक डॉ.एम.के.गुप्ता, श्री सुदीप तोमर, श्री मुकेश बेनल, श्री राजेश पासी, श्री सुनील वाणी, श्री उमेश कनेश आदि उपस्थित थे।