यदि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होता तो क्या होता,चिंतित थी सरकार
नई दिल्ली । केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से 24 घंटे पहले आईबी, गृह मंत्री अमित शाह और संघ-भाजपा की अलग-अलग रिपोर्टों ने इस आंदोलन को लेकर सरकार की चिंता बढ़ा दी थी।हालात संभालने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का आंदोलन पर कोई खास असर नहीं पड़ रहा था। सूत्रों की माने तो इनमें सबसे अहम आईबी की वह रिपोर्ट थी, जिसमें अंदेशा जताया गया था कि यदि अगले 48 घंटे के भीतर कोई समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन सरकार के हाथों से बाहर निकल सकता है। इसी दौरान गृह मंत्री अमित शाह की रिपोर्ट में भी कहा गया कि यदि समाधान नहीं निकला तो विपक्षी एकता फिर से मजबूत हो सकती है। वहीं, भाजपा-संघ की रिपोर्ट में आंदोलन के कई राज्यों में व्यापक रूप लेने की आशंका जताई गई। खुफिया इनपुट में यह भी स्पष्ट किया गया था कि यदि जल्दी समाधान नहीं निकला तो युवाओं का यह प्रदर्शन पूरी तरह बेकाबू हो सकता है।खुफिया इनपुट बता रहे थे कि सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि कई अन्य राज्यों में भी छात्रों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा था। शुरुआत में सरकार का मानना था कि पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त होने के बाद छात्रों का गुस्सा शांत हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वांगचुक का अनशन खत्म होने के बावजूद प्रदर्शन और तेज हो गया तथा कई राज्यों में फैल गया था। इन सब समस्याओं का एक ही समाधान था, वह था केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ...अंततः केंद्रीय मंत्री ने इस्तीफा दिया और केंद्र सरकार ने भी राहत की सांस ली l


