हिमांशु लोखंडे ऑस्ट्रेलिया की प्रसिद्ध मोनाश यूनिवर्सिटी में करेंगे अध्ययन
भोपाल l मध्यप्रदेश शासन की विदेश अध्ययन योजना पिछड़ा वर्ग के प्रतिभाशाली युवाओं के सपने साकार कर रही है। भोपाल जिले के साकेत नगर निवासी श्री हिमांशु लोखंडे पिता श्री सुखदेव लोखंडे ने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
भोपाल के होनहार छात्र हिमांशु लोखंडे का चयन ऑस्ट्रेलिया की प्रसिद्ध मोनाश यूनिवर्सिटी (Monash University) से 'मास्टर ऑफ साइबर सिक्योरिटी' (Master of Cyber Security) पाठ्यक्रम के लिए हुआ है। यह चयन मध्यप्रदेश शासन की पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 के लिए हुआ है। योजना के माध्यम से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए श्री हिमान्शु को 8 जुलाई 2026 को प्रथम वर्ष की शिक्षण शुल्क राशि के रूप में 37,58,880 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। यह प्रतिष्ठित पाठ्यक्रम दो वर्ष की अवधि का है। इसके अलावा योजना के तहत निर्वाह भत्ता, आकस्मिकता भत्ता, बीमा राशि तथा वायुयान किराया जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
हिमांशु ने अपनी स्कूली शिक्षा सागर पब्लिक स्कूल, साकेत नगर, भोपाल से पूरी की है और इसके बाद भारती विद्यापीठ डीम्ड यूनिवर्सिटी, पुणे (महाराष्ट्र) से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में बी.टेक. (B.Tech.) की डिग्री हासिल की है। श्री हिमांशु की इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे जिले में खुशी का माहौल है। साकेत नगर भोपाल से निकलकर विश्व की अग्रणी शिक्षण संस्थाओं में ऑस्ट्रेलिया की प्रसिद्ध मोनाश यूनिवर्सिटी तक पहुंचना युवाओं के लिए प्रेरणादायी उदाहरण बन गया है। श्री हिमांशु ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और निरंतर मेहनत को दिया। उन्होंने कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। उनका सपना है कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे समाज और प्रशासनिक क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कार्य करें। पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश शासन द्वारा पिछड़ा वर्ग के मेधावी विद्यार्थियों को विदेश में स्नातकोत्तर एवं शोध उपाधि (पीएचडी) के अध्ययन हेतु आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि वे वैश्विक ज्ञान और अनुभव प्राप्त कर देश एवं समाज के विकास में योगदान दे सकें।
हिमांशु की सफलता जिले के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। उनकी यह कहानी यह संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प और शिक्षा के प्रति समर्पण से हर सपना साकार किया जा सकता है। बहुत-बहुत बधाई, हिमांशु! यह वाकई एक असाधारण और गर्व की बात है। आपकी इस शानदार यात्रा और ऑस्ट्रेलिया में आगे की पढ़ाई के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं!


