चिया फसल की खेती से समृद्धि की नई राह की ओर कृषक श्री हिम्मत सिंह नाहर

शाजापुर जिले के बेरछा निवासी कृषक श्री हिम्मत सिंह नाहर ने चिया अपनाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि अपने क्षेत्र में एक नई पहचान भी बनाई है। पारंपरिक फसलों की बजाय उन्होंने चिया की खेती को अपनाया और अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गए।
श्री नाहर बताते हैं कि चिया की फसल को बोना बेहद आसान है। मिट्टी को बारीक करके छिड़काव विधि से 600 ग्राम बीज प्रति बीघा बोया जाता है। इस फसल की खास बात यह है कि इसमें किसी भी प्रकार की दवाई या कीटनाशक की आवश्यकता नहीं होती। फसल प्राकृतिक रूप से तैयार होती है, जो इसे स्वास्थ्यवर्धक और पर्यावरण के अनुकूल बनाती है।
श्री नाहर के अनुसार प्रति बीघा 3 से 4 क्विंटल चिया का उत्पादन होता है। इस फसल की एक और विशेषता यह है कि यह 2 साल तक खराब नहीं होती, जिससे किसानों को बाजार में इसे बेचने के लिए अधिक समय मिलता है। वर्तमान में चिया 15 से 17 हजार रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिकती है, जो इसे अत्यधिक लाभकारी बनाती है। इसके अलावा चिया की खेती में पानी की खपत भी कम होती है, जिससे यह सूखे क्षेत्रों के लिए आदर्श फसल बन जाती है।
श्री हिम्मत सिंह नाहर ने इस फसल के माध्यम से न केवल अपनी आमदनी बढ़ाई है, बल्कि अपने गांव के अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित किया है। यह फसल किसानों के लिए आर्थिक समृद्धि का द्वार खोल सकती है। उनकी इस पहल से न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि उनके गांव के अन्य किसानों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आ रहा है। श्री हिम्मत सिंह आज चिया की खेती में सफलता के प्रतीक बन गए हैं।