एकीकृत कृषि क्लस्टर (IFC) ने छाया कुम्हलवार को दी आत्मनिर्भरता की नई पहचान
बालाघाट l मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत विकासखंड वारासिवनी के ग्राम कोलिवाड़ा की निवासी श्रीमती छाया कुम्हलवार ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। एक समय खेतों में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाली छाया आज अपने स्वयं के ब्यूटी पार्लर का सफल संचालन कर रही हैं और आर्थिक रूप से सशक्त बन चुकी हैं। ऐसे परिवर्तनकारी उदाहरणों का दस्तावेजीकरण और प्रसार ग्रामीण महिलाओं को प्रेरित करने के लिए भी किया जाता है।वर्ष 2022 में हरितक्रांति आजीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद छाया कुम्हलवार को आरएफ, सीआईएफ तथा कैश क्रेडिट लिमिट (CCL) के माध्यम से वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। इस सहयोग से उन्होंने अपने गांव में ब्यूटी पार्लर की शुरुआत की। मेहनत, लगन और कौशल के बल पर उनका व्यवसाय लगातार आगे बढ़ा और आज वे प्रतिमाह लगभग 7,000 रुपये की नियमित आय अर्जित कर रही हैं।
समूह से जुड़ने से पहले उनकी व्यक्तिगत मासिक आय लगभग 5,000 रुपये तथा परिवार की आय 12,000 रुपये थी। वर्तमान में उनकी व्यक्तिगत आय बढ़कर 23,000 रुपये तथा परिवार की मासिक आय लगभग 30,000 रुपये हो गई है।
आर्थिक स्थिति मजबूत होने से उन्होंने अपने परिवार के लिए पक्का मकान बनाया और बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराई, जिससे पूरे परिवार के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया।श्रीमती छाया कुम्हलवार बताती हैं कि स्वयं सहायता समूह से मिला विश्वास, प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग ही उनकी सफलता की सबसे बड़ी ताकत बना। आज वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। एकीकृत कृषि क्लस्टर (IFC) एवं मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की यह पहल ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण, स्वरोजगार और सम्मानजनक जीवन की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन रही है।


