जबेरा में संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी एवं कार्यकर्ताओं के द्वारा महान क्रान्तिकारी अमर शहीद राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस के अवसर माल्यार्पण किया। आदिवासी समुदाय एवं अन्य नागरिकों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित गई। यह दोनों वीर 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ खड़े हुए और अमर हो गए। राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाहगोंडवाना साम्राज्य के हिस्से थे। विद्रोह की मशाल उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ उस समय फ़ूँकी जब पूरे देश में स्वतन्त्रता की चाह और आक्रोश बढ़ रहा था। उनकी गिरफ्तारी अंग्रेजों ने की थी और उन्हें टॉर्चर (यंत्रणा) के बाद तोप की नोक पर बांधकर मार डाला गया एक अमानवीय सजाजिसमें न्याय प्रक्रिया नहीं निभाई गई थी। रघुनाथ शाह ने अंग्रेजों के सामने जब पूछा गया कि क्या वह डर रहे हैंतो उन्होंने साहस के साथ उत्तर दिया कि मौत से डर नहीं है।

            राज्यमंत्री श्री लोधी ने कहा कि हम सौभाग्यशाली है कि जबेरा विधानसभा में अनेक वीर वीरांगनाओं ने जन्म लिया। एक और शहीद पंडित देवकरण तिवारी जी जिनका जन्म सुरई में हुआ इतिहासकारों ने जगह नहीं दी, हमने तय किया है कि ऐसे शहीदों को इतिहास में जगह मिले आने वाले समय में हम प्रत्येक वर्ष शहीद दिवस मनायेगे एवं प्रयास करूगा कि पुस्तक का विमोचन भी किया जाए। शंकर शाहरघुनाथ शाह का बलिदान सिर्फ एक आदिवासी राजा व पुत्र की वीरता नहीं हैबल्कि यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में जनआन्दोलन की व्यापक परंपरा का हिस्सा है जहाँ विभिन्न समुदायों ने अंग्रेजी हुकूमत की जड़ें काटने के लिए अपना रक्त दिया। शंकर शाह और रघुनाथ शाह की वीरगाथा हमें प्रेरित करती है कि राष्ट्र के लिए अपना कर्तव्य निभानाअन्याय के खिलाफ आवाज उठाना और अत्याचार के सामने डट जाना ये सिर्फ इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इनकी याद हमें आज भी यह संकल्प दिलाती है कि देश की आज़ादी और समानता की लड़ाई को आगे बढ़ाना है।