ऐसे हुआ किसानों का कल्याण 

एंबुलेंस और अपंजीकृत वाहनों से लाए गए किसान, 

कार्यशालाओं में,
परोसे गए काजू-बादाम

रायसेन | हरीश मिश्र ( 9584815781 )

मध्य प्रदेश सरकार  वर्ष 2026 को 'कृषक कल्याण वर्ष' के रूप में समर्पित किया है, जबकि 
किसान कल्याण एवं कृषि विभाग, रायसेन के अधिकारी कर्मचारी 2025 में ही कृषकों का कल्याण कर चुके।
    कागज़ों में किसान आज भी “लाभार्थी” है, लेकिन ज़मीनी हकीकत में वह अक्सर एक “आंकड़ा” बनकर रह जाता है। मध्य प्रदेश में कृषि विस्तार की अहम योजना सबमिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन (आत्मा) के तहत रायसेन जिले में हुए खर्च और व्यवस्थाओं को लेकर ऐसे ही सवाल उठ खड़े हुए हैं।
‌     7 दिसंबर 2024 को संचालनालय किसान कल्याण एवं कृषि विभाग, भोपाल ने पीएफएमएस के अंतर्गत ‘आत्मा’ योजना के लिए ₹1458.32291 लाख की प्रथम किस्त जारी की। इसमें से ₹34.814 लाख रायसेन जिले को तीन से पांच दिवसीय कृषि  प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित करने के लिए मिले। इस कार्यशाला का उद्देश्य किसानों को नई तकनीक, उन्नत कृषि पद्धतियों और प्रबंधन कौशल से जोड़ना था। लेकिन सूचना के अधिकार  के तहत प्राप्त दस्तावेजों का अध्ययन एक अलग ही तस्वीर पेश करता है।
 
प्रशिक्षण या प्रबंधन ?

दस्तावेजों के अनुसार, कृषि विज्ञान केंद्र, नकतरा में 25/03/25 को आयोजित कार्यशाला के लिए गैरतगंज, बेगमगंज, सांची, बरेली, बाड़ी, सुल्तानपुर, सिलवानी, उदयपुरा से किसानों को लाने-ले जाने में एंबुलेंस CG 04 H 7348 और अपंजीकृत वाहन MP 04 ZT 2558 जैसे कई वाहनों का उपयोग किया गया।

यह न केवल सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। कई मामलों में जिन वाहनों का उल्लेख है, उनका पंजीयन परिवहन विभाग में स्पष्ट नहीं है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि इन वाहनों के नाम पर कैसे भुगतान  स्वीकृत और जारी किया गया।

खर्च बनाम उद्देश्य !

योजना का मकसद किसानों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना था, लेकिन खर्च के ब्योरे में प्राथमिकताएं कुछ और ही नजर आती हैं। दस्तावेज बताते हैं कि कार्यशाला में बीकानेर मिष्ठान भंडार, रायसेन से काजू, किशमिश, बादाम और काजू कतली जैसे महंगी मिठाइयों और ड्राई फ्रूट्स पर खर्च किया गया।
    सीमित बजट वाली किसानोन्मुखी योजना में इस तरह के व्यय का औचित्य स्पष्ट नहीं है।  यह प्रशिक्षण कार्यक्रम थे या आतिथ्य प्रबंधन का प्रदर्शन ?

दस्तावेजों में विसंगतियां

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, कई मदों में खर्च और वास्तविक गतिविधियों के बीच मेल नहीं बैठता।कुछ वाहनों के नंबर अधूरे दर्ज हैं
कई भुगतान प्रविष्टियां अस्पष्ट हैं‌‌। खर्च का समायोजन संदिग्ध प्रतीत होता है‌। ये विसंगतियां न केवल पारदर्शिता पर सवाल उठाती हैं, बल्कि संभावित वित्तीय अनियमितताओं की ओर भी संकेत करती हैं।                                       खरीदी केंद्रों पर किसानों को न पीने का पानी मिल रहा है, न छांव की व्यवस्था है। वहीं दूसरी ओर किसानों के नाम पर काजू कतली जैसे बिल निकालना गंभीर अनियमितता है। इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।      ठाकुर बृजेन्द्र बघेल,भारतीय किसान संघ                                        “हम धूप में लाइन में खड़े हैं, न पानी है न छांव। उधर हमारे नाम पर काजू-कतली के बिल बन रहे हैं—किसान के हिस्से सिर्फ इंतज़ार ही आया है।

इरफान जाफरी ,अध्यक्ष, किसान जागृति संगठन                      आप जो जानकारी दे रहे हैं, उसकी जांच उपरांत कारवाई की जाएगी - के पी भगत, उप संचालक कृषि, रायसेन                                                           मोटर व्हीकल कानून 1988 के अनुसार-  बिना रजिस्ट्रेशन कोई भी वाहन सड़क पर नहीं चल सकता ।
    बिना फिटनेस/परमिट वाहन चलाना अपराध है । ऐसे वाहन का उपयोग “सरकारी काम” में भी अवैध है।                                                                        किसान रैली में लोगों को जुटाने के लिए एंबुलेंस का उपयोग किया गया। वाहन की फिटनेस 30 मार्च 2023 को समाप्त हो चुकी है, यह 19 साल पुराना कंडम वाहन है और इसका आगे का शीशा भी टूटा हुआ है।ऐसे कई वाहनों का भुगतान किया गया है, जिनका रिकॉर्ड परिवाहन विभाग की साइट पर उपलब्ध नहीं है।