जबलपुर जिले के विकासखंड पाटन में किसानों को धोखाधड़ी से बचाने और फसल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में अनुविभागीय कृषि अधिकारी पाटन डॉ. इंदिरा त्रिपाठी ने किसानों को असली एवं नकली उर्वरकों की पहचान करने की सरल भौतिक विधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

डॉ त्रिपाठी ने यूरिया की पहचान के तरीके साझा करते हुए बताया कि इसके दाने सफेद, चमकदार और लगभग एक समान आकार के मोती की तरह गोल होते हैं। यदि इसे हथेली पर रखकर मुट्ठी बंद कर फूंक मारी जाए, तो यह हल्का गीला हो जाता है।

यूरिया के दाने खुले में रखने पर भी यह वातावरण की नमी अवशोषित कर लेते हैं । गर्म तवे पर डालने पर ये पिघल जाते हैं और आंच तेज करने पर अमोनिया गैस की तीखी गंध आती है। यूरिया पानी में पूरी तरह घुलनशील होता है और इसके घोल को छूने पर ठंडा महसूस होता है।

वहीं, डीएपी कठोर, दानेदार, भूरे, काले या बादामी रंग का होता है, जिसे नाखूनों से आसानी से नहीं तोड़ा जा सकता। हथेली पर मुट्ठी बंद करके फूंक मारने पर यह भी हल्का गीला हो जाता है। इसके दानों को हाथ में लेकर थोड़ा चूना मिलाकर रगड़ने पर एक तीक्ष्ण गंध आती है और तवे पर धीमी आंच में गर्म करने पर इसके दाने फूलकर बड़े हो जाते हैं।

अनुविभागीय कृषि अधिकारी पाटन ने सुपर फास्फेट नरम, दानेदार, भूरे, काले या बादामी रंग का होता है, जो नाखूनों से आसानी से टूट जाता है। इसका पाउडर भूरे मटमैले रंग का होता है। पाउडर को खुले में रखने पर वातावरण की नमी अवशोषित कर गीला हो जाता है। सुपर फास्फेट के दाने तवे पर गर्म करने पर यथावत बने रहते हैं, ये डीएपी की तरह फूलते नहीं हैं।

म्यूरेट ऑफ पोटाश का स्वरूप सफेद/ईंट जैसे रंग का कणाकार, पिसा हुआ नमक तथा लाल मिर्च पाउडर के मिश्रण जैसा होता है।गीला करने पर इसके कण आपस में चिपकते नहीं हैं। पानी में घोलने पर पोटाश का लाल भाग पानी के ऊपर तैरने लगता है। खुले में रखने पर यह भी वातावरण की नमी सोखकर गीला हो जाता है।

एनपीके के दानों को तवे पर धीमी आंच में गर्म करने पर ये लाई (मुरमुरे) की तरह फूटकर बड़े हो जाते हैं। खुले में रखने पर ये भी वातावरण की नमी अवशोषित कर गीले हो जाते हैं। वहीं जिंक सल्फेट के दाने हल्के सफेद, पीले तथा भूरे बारीक कणों के आकार के होते हैं।डीएपी के घोल में यदि जिंक सल्फेट का घोल मिलाया जाए, तो थक्केदार घना अवशेष बनता है जो तली में जाकर बैठ जाता है।

अनुविभागीय कृषि अधिकारी डॉ इंदिरा त्रिपाठी ने किसानों से  उर्वरक खरीदते समय पूरी सावधानी बरतने तथा इन सरल घरेलू और भौतिक तरीकों से उर्वरकों की शुद्धता की जांच करने की अपील की है। उन्होंने किसी भी प्रकार के संदेह या शिकायत होने पर तुरंत कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने का आग्रह भी किसानों से किया है, ताकि नकली खाद बेचने वाले लोगों पर सख्त कार्रवाई की जा सके।