श्री सदगुरु नेत्र चिकित्सालय में नेत्र शिविर आयोजकों का हुआ सम्मान, माइन्ड इम्पॉवरिंग सोशल फाउंडेशन के प्रतिनिधि भी सम्मानित
छतरपुर/चित्रकूट। श्री सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय, जानकीकुंड (चित्रकूट) में आयोजित सामुदायिक नेत्र जागरूकता एवं स्पॉन्सर मिलन सम्मान समारोह में मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में नेत्र शिविरों का सफल संचालन करने वाले समाजसेवियों एवं संस्थाओं के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया।कार्यक्रम में श्री सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय के डायरेक्टर, सीईओ एवं ट्रस्टी डॉ. इलेश जैन, एचआर हेड सुविश जैन, डॉ. विजय सिंह मध्यप्रदेश-उत्तरप्रदेश प्रभारी भीष्म शुक्ला की गरिमामयी उपस्थिति रही। समारोह का उद्देश्य नेत्र स्वास्थ्य के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने तथा समाज के अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने में योगदान देने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं के प्रयासों को सम्मानित करना था। इस अवसर पर राजनगर विकासखंड, जिला छतरपुर की समाजसेवी संस्था माइन्ड इम्पॉवरिंग सोशल फाउंडेशन के प्रतिनिधि मनीष खटीक को भी उनके उत्कृष्ट सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी योगदान के लिए सम्मानित किया गया। संस्था द्वारा समय-समय पर क्षेत्र में जनसेवा, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान एवं निःशुल्क नेत्र शिविरों के आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई जाती रही है। सम्मान प्राप्त करने के उपरांत मनीष खटीक ने श्री सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय परिवार एवं कार्यक्रम आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि समाज सेवा के प्रति समर्पित सभी सहयोगियों एवं कार्यकर्ताओं के सामूहिक प्रयासों की पहचान है। उन्होंने विशेष रूप से भरत यादव, शिवम दुबे एवं संस्था से जुड़े सभी साथियों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य में भी माइन्ड इम्पॉवरिंग सोशल फाउंडेशन जनहित एवं स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में निरंतर कार्य करती रहेगी।कार्यक्रम में प्रदेशभर से आए नेत्र शिविर आयोजकों, चिकित्सकों एवं समाजसेवियों ने सहभागिता की। अतिथियों ने अपने संबोधन में नेत्र स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए लोगों से नियमित नेत्र परीक्षण कराने तथा जरूरतमंदों को उपचार सुविधाओं से जोड़ने का आह्वान किया। यह सम्मान समारोह समाज सेवा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं के लिए प्रेरणास्रोत साबित हुआ तथा नेत्र स्वास्थ्य के प्रति जन-जागरूकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।


