कहीं नरोत्तम मिश्रा के आंसुओं की बाढ़ में बह ना जाए दतिया का वोटर
दतिया l जिस तरीके की चीजें दतिया में हुई है, वह बीजेपी की संस्कृति का हिस्सा नहीं है। पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा बड़े नेता है लेकिन चुनाव हर कोई लड़ना चाहता है। किसी को टिकट न मिले इसकी वजह से उसको तकलीफ होना स्वाभाविक है। समर्थकों का उत्साह कम होता है। लेकिन समर्थक इस तरह की चीजें ना करें, इसको रोकना उस नेता की भी जिम्मेदारी है जिसके लिए समर्थक सड़क पर निकले हैं। नरोत्तम मिश्रा को पार्टी ने बहुत कुछ दिया है और उम्मीद है कि वह पार्टी के लिए लगातार खड़े भी रहेंगे l मंच पर भाषण देने के दौरान भी टिकट न मिलने का दर्द झलका और वह मंच पर ही फफक - फफक कर रो पड़े निसंदेह यदि वास्तव में नरोत्तम मिश्रा को चाहने वाले दतिया में हैं तो उनके आंसुओं की बाढ़ में कहीं वोटर बह ना जाए l दूसरी तरफ नरोत्तम मिश्रा से अदावत रखने वाले पूर्व विधायक राजेंद्र भारती जैसे कई दिग्गज नेता तो इस बात से ही खुश है कि नरोत्तम मिश्रा को भाजपा ने टिकट नहीं दिया है। वहीं दूसरी तरफ विजयपुर उपचुनाव की हार से सबक लेते हुए भाजपा ने इस चुनाव में एक बड़ा कदम उठाया है जिससे भाजपा की जीत आसान हो सकती है l वह कदम है केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के हाथों में दतिया उपचुनाव की कमान देना l इसमें कहीं कोई संदेह नहीं है कि यदि विजयपुर उपचुनाव में भी केंद्रीय मंत्री सिंधिया को एक्टिव कर दिया गया होता तो भाजपा बड़ी आसानी से विजयपुर का उपचुनाव जीत सकती थी l उस गलती को भाजपा ने इस बार सुधार लिया है l सिंधिया गुट के मंत्री विधायक और बड़े-बड़े नेता भी अब दतिया में सक्रिय हो गए हैं l दतिया में पूर्व मंत्री इमरती देवी की भी बड़ी भूमिका होगी क्योंकि ब्राह्मण समाज के बाद दूसरा सबसे बड़ा वोटर है जाटव समाज l इमरती देवी के एक्टिव होने से भाजपा को जाटव समाज की वोट भी आसानी से मिलेंगे जो पिछले चुनाव में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को नहीं मिले थे l भाजपा के रणनीतिकार इस उप चुनाव को लेकर बहुत गंभीर हैं और गांव हो या शहर एक-एक वोटर पर उनकी सीधी नजर हैं, आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश के लगभग सभी दिग्गज नेता भी दतिया में डेरा डालेंगे और आशुतोष तिवारी की जीत में अपनी - अपनी भूमिका भी निभाएंगे l


