आंसू तब छलकते हैं, जब शब्द मौन हो जाते हैं और भावनाएं अपना रास्ता स्वयं बना लेती हैं
नर_को_भी_आँसू_आते_हैं...
कहा जाता है कि पुरुष रोते नहीं।
लेकिन यह आधा सच है।
सच तो यह है कि पुरुष भी उतना ही संवेदनशील होता है।
राजनीति में कठोर व्यक्तित्व और बेबाक शैली के लिए पहचाने जाने वाले नरोत्तम मिश्रा भी भावुक हो उठे। यह दृश्य याद दिलाता है कि संवेदनाएं किसी पद, प्रतिष्ठा या राजनीतिक कद की मोहताज नहीं होतीं।
आंसू कमजोरी का नहीं, मनुष्यता का प्रमाण हैं। वे तब छलकते हैं, जब शब्द मौन हो जाते हैं और भावनाएं अपना रास्ता स्वयं बना लेती हैं।
नर को भी आंसू आते हैं, क्योंकि वह भी अंततः मनुष्य है।
Harish Mishra Raisen


