खरगोन जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र झिरन्या में स्ट्रॉबेरी की खेती करना एक सपना जैसा है। कोई कल्पना भी नहीं कर सकता है कि इस अति पिछड़े क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी की खेती हो सकती है। लेकिन इस कल्पना और सपने को पन्नालाल सोलंकी ने साकार करके दिखा दिया है। मनरेगा योजना की मदद लेकर पन्नालाल ने स्ट्रॉबेरी की खेती में सफलता हासिल कर ली है और इससे वह लखपति बन गया है। पन्नालाल अन्य किसानों के लिए भी एक आदर्श और प्रेरणास्त्रोत बन गया है।      

  खरगोन जिले के विकासखण्ड झिरन्या के ग्राम कोठा बुजुर्ग के निवासी गरीब आदिवासी पन्नालाल सोलंकी अपने पुत्र विजय सोलंकी के साथ परिवार के पालन पोषण के लिए मनरेगा व अन्य कृषकों के खेत में दिहाड़ीं मजदूरी करते थे । उनकी बहुत कम जमीन होने से पर्याप्त फसल नहीं होती थी और मजदूरी ही एक मात्र सहारा था। ऐसे में मनरेगा योजना इनके लिए मददगार बनकर सामने आयी है। ग्राम पंचायत से मनरेगा योजना अंतर्गत पन्नालाल के नाम से कपिलधारा कूप का निर्माण कराया गया है। खेत में सिंचाई का साधन होते ही पन्नालाल पर कुछ नया करने का जुनून सवार हो गया। आत्मा परियोजना द्वारा प्रयोग के तौर पर नगदी फसल स्ट्रॉबेरी की खेती करने का सुझाव दिया गया तो पन्नालाल सहर्ष तैयार हो गया।  

        आत्मा परियोजना द्वारा पन्नालाल और उसके पुत्र विजय को स्ट्रॉबेरी की खेती का व्यवहारिक ज्ञान तथा डेमोंसट्रेशन दिया गया। पन्नालाल और उसके पुत्र विजय सोलंकी द्वारा अपने खेत में लगभग एक बीघा में 2000 स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए गए हैं। इन पौधों से 2 से 3 माह में स्ट्रॉबेरी बेचकर डेढ़ लाख की आय प्राप्त होने  लगी है। अब पन्नलाल और उसके पुत्र विजय सोलंकी को कहीं मजदूरी करने की आवश्यकता नहीं रह गई है। पूरा परिवार स्ट्रॉबेरी की खेती में ही लगा रहता है। स्ट्रॉबेरी की खेती में ड्रिप व मल्चिंग का भी उपयोग किया जा रहा है ।      

    विजय सोलंकी द्वारा बताया गया कि उसे अब बाहर मजदूरी करने की आवश्यकता नहीं है। वह अपने परिवार के साथ स्ट्रॉबेरी की खेती में खुश है तथा इसे बढ़ाना चाहता है। ताकि इंदौर, भोपाल, मुंबई के मार्केट में बड़े स्तर पर स्ट्रॉबेरी बेची जा सके। वर्तमान में स्ट्रॉबेरी खरगोन में ही बिक जाती है। झिरन्या क्षेत्र की जलवायु अच्छी होने से स्वाद अच्छा आ रहा है। वह अन्य कृषकों को भी अपने खेत में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मनरेगा योजना से कपिलधारा कूप का निर्माण कराने की सलाह दे रहा है। उसका कहना है कि एक बार सिंचाई व्यवस्था होने से आपको उन्नत कृषक बनने से कोई नहीं रोक सकता।        

  जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री आकाश सिंह द्वारा बताया गया कि मनरेगा योजना में कृषि आधारित कार्य को प्राथमिकता दिए जाने से जिले में योजना प्रारंभ से लगभग 23500 से अधिक कूप का निर्माण किया गया है। किसानों की सिंचाई व्यवस्था के लिए मनरेगा से कपिलधारा कूप निर्माण से जिले के किसान उन्नत खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं।  

      परियोजना अधिकारी मनरेगा श्री श्याम कुमार रघुवंशी द्वारा बताया गया कि मनरेगा योजना में 60 प्रतिशत व्यय कृषि आधारित कार्य जैसे कपिलधारा कूप, नंदन फलोद्यान, खेत तालाब पर किए जाने से किसानों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है।