भोपाल l पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने मध्यप्रदेश जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत जलग्रहण (वाटरशेड) विकास कार्यों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही उपलब्ध तकनीकों और संसाधनों का उपयोग अन्य विकास कार्यों में भी किया जाए। उन्होंने कहा कि डीपीएपी विकासखंडों की अवधारणा का वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप पुनर्मूल्यांकन किया जाए तथा जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के समग्र प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाए।

मंत्री श्री पटेल ने निर्देश दिए कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं भू-स्थानिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) के उपयोग के लिए पृथक व्यवस्था विकसित की जाए। साथ ही भू-जल पुनर्भरण के लिए "कर्मभूमि से मातृभूमि" अभियान की अवधारणा पर कार्य करते हुए वैज्ञानिक संस्थानों के सहयोग से प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि पुरानी जल संरचनाओं एवं वॉटर बॉडी के पुनर्भरण के लिए जलग्रहण परियोजनाओं का अधिकतम उपयोग किया जाए। बैठक में एमपीएसईडीसी के सहयोग से तैयार किए गए जलग्रहण एटलस की भी जानकारी भी दी गई।