कटनी – सनकुई गांव की रूकमणी काछी ने स्‍व-सहायता समूह की आजीविका संवर्धन गतिविधि से जुड़कर और अपनी मेहनत और लगन से अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सशक्त बनाया। अपने पति अनूप काछी के साथ मिलकर वह पहले एक छोटी सी मनिहारी की दुकान चलाती थीं, जिससे परिवार का गुजारा मुश्किल से होता था। लेकिन रूकमणी दीदी ने हार नहीं मानी और अपने जीवन में बदलाव लाने के लिए स्व-सहायता समूह "विराट" से जुड़ गईं।स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद रूकमणी दीदी को सामुदायिक निवेश कोष (सीआईएफ) से 80 हजार रुपये और कैश क्रेडिट लिमिट से 1 लाख रुपये का ऋण मिला। इस राशि का उपयोग उन्होंने अपनी मनिहारी की दुकान को विस्तार देने और व्यवसाय को मजबूत करने में किया। उनकी सूझबूझ और मेहनत से दुकान की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इसके अलावा, उनके पति अनूप काछी एक अंडे की दुकान चलाते हैं और डेढ़ एकड़ जमीन पर कृषि कार्य करते हैं, जिससे परिवार की आय में और इजाफा हुआ।अब वर्तमान में रूकमणी दीदी की मासिक आय लगभग 22 हजार रुपये है। वह अपने दो बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनकी मेहनत और स्व-सहायता समूह की सहायता ने न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारी, बल्कि वह समुदाय की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं। रूकमणी दीदी की कहानी सिखाती है कि दृढ़ संकल्प और छोटे कदमों से बड़े बदलाव संभव हैं।