तरबूज फसल के प्रक्षेत्रों का किया निरीक्षण, आवश्यक एडवायजरी जारी

बुरहानपुर । कृषि विज्ञान केन्द्र सांडसकला के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कार्तिकेय सिंह, डॉ. भूपेन्द्र सिंह, उप संचालक उद्यान श्री राजू बड़वाया, उप संचालक कृषि श्री एम. एस. देवके ने संयुक्त रूप से ग्राम जामुनिया, खकनार, सावली, निमंदड़ आदि ग्रामों में तरबूज फसल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान देखा गया कि वर्तमान में जो तरबूज की फसल दिसम्बर, जनवरी माह में लगाई गई हैं। उसमें लगातार वातावरण में नमी एवं तापमान कम होने से एफीड एवं थ्रिप्स को अनुकुल मौसम मिलने से इनका अधिक संक्रमण होने के कारण पौधों पर वायरस जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। जिससे पौधंे की पत्तियां डार्क ग्रीन कलर की होकर सिकुड़ रही हैं। वहीं नवीन पत्तियाँ पीली पड़ने लगी हैं। इसके लिए वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए किसानों को आवश्यक सुझाव दिये गये है। - फसल चक्र अपनाये, लगातार एक ही फसल या एक कुल की फसल की खेती करने से बचें। - खेत के आसपास एवं अन्दर सफाई करें। - रोगग्रस्त पौधों को उखाड़कर खेत के बाहर फेंक देवे या गड्ढा खोदकर दबा देवें। - आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति अवश्य करें, जिसके साथ ही सूक्ष्म पौषक तत्व कैल्शियम, बोरान, मैंगनीज आदि की अनुंशसित मात्रा का उपयोग करें। - सूक्ष्म पौषक तत्वों जैसे बोरान, आयरन, मैंगनीज, कॉपर, जिंक एवं मोलीबेडेनम की पूर्ति के लिए माइक्रो न्यूट्रेट 25 एमएल प्रति पम्प के हिसाब से स्प्रे करें। - प्रभावित खेत में बीमारी फैलाने वाले कीट नियंत्रण हेतु इन रसायन का छिड़काव करें। - क्लोरोपायरीफांस 45 एमएल, एसीफेट 15 ग्राम, स्टीकर 15 एमएल, नीमतेल 50 एमएल, 15 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें या इमिडाक्लोरोपिड 6 एमएल, एसीफेट 15 ग्राम, स्टीकर 15 एमएल, नीमतेल 50 एमएल-15 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें तथा फिप्रोनिल 25 एमएल, स्टीकर 15 एमएल, नीमतेल 50 एमएल 15 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।