भोपाल l प्रदेश की राजनीति में इन दिनों कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद सियासी तापमान लगातार बढ़ रहा है। सौ टके का सवाल तो यह है कि यदि भाजपा को कांग्रेस के भीतर से जानकारी मिली थी, जैसा कि दावा किया जा रहा है, तो आखिर वह विभीषण कौन था...? क्या यह केवल राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है या फिर वास्तव में कांग्रेस के भीतर कोई ऐसा चेहरा है जिसने पार्टी को कमजोर किया?

राजनीति में विभीषण शब्द केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि विश्वास और विश्वासघात के बीच खींची गई वो लाइन है, जो किसी भी दल को भीतर से झकझोर सकती है। इसलिए सवाल सवाल यह है कि क्या कांग्रेस अपने ही बीच में छिपे उस चेहरे को पहचान पाएगी, जिस पर आज राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है...?

प्रदेश की राजनीति अब सिर्फ एक ही सवाल का जवाब जानना चाहती है कि— क्या कांग्रेस का कोई विभीषण है, या यह सब केवल अफवाह फैलाकर आरोप लगाने का खेल भर है...?