भोपाल। हर पुलिस अफसर का काम करने का अपना-अपना अलग तरीका होता है लेकिन मकसद सबका सिर्फ एक ही होता है कि कैसे अपराध मुक्त समाज का निर्माण हो और इसी सपने को पूरा करने के लिए वह प्रण - प्राण से जुट जाते हैं। वैसे भी पुलिस की नौकरी कोई 8-10 घंटे की नौकरी नहीं होती बल्कि पूरी 24 घंटे की ही होती है और इस 24 घंटे की नौकरी की जहां बहुत सी खूबियां है वहीं खामियां भी बहुत हैं।

 पुलिस की नौकरी का अपना अलग मजा भी है और रुतबा भी होता है। यदि पुलिस ढंग से काम करें तो पुलिस की नौकरी देशभक्ति और जनसेवा का सर्वश्रेष्ठ साधन भी हो सकती है। वैसे भी पुलिस सेवा का मूलमंत्र देशभक्ति और जन सेवा ही होता है ।

आज हम ऐसे ही एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अफसर की बात कर रहे हैं जिनके बारे में उनके विभाग के ही वरिष्ठ अफसर कहते हैं कि वह सिर्फ काम करने वाले ही नहीं बल्कि काम करके सकारात्मक परिणाम देने वाले अफसर हैं । जी हां हम बात कर रहे हैं भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार की।                             

उनकी आमद के साथ ही भोपाल में चौतरफा बदलाव नजर आ रहा है और पुलिस अधिकारियों में सन्नाटा भी है क्योंकि साहब के मिजाज के हिसाब से ही अधीनस्थों का काम करने का तरीका भी बदल जाता है । पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार और सामुदायिक पुलिसिंग पर विशेष जोर दे रहे हैं और रही बात निरीक्षण और औचक निरीक्षण की तो वे लगातार निरीक्षण और औचक निरीक्षण भी कर रहे हैं जिससे उन्हें थानों में काम-काज की वास्तविक स्थिति का पता भी चल रहा है।

 दरअसल राजधानी होने के नाते भोपाल में लगभग रोज ही वीवीआईपी मूवमेंट रहता है यही वजह है कि वे ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने में लगे हैं ताकि वीवीआईपी मूवमैंट का असर आमजन पर ना पड़े ,उन्हें किसी भी तरह की ट्रैफिक से जुड़ी समस्या का सामना ना करना पड़े और अब बात करें सामुदायिक पुलिसिंग की तो पुलिस कमिश्नर स्वयं सीधे आमजन से संवाद कर रहे हैं और पुलिस अधिकारियों को भी लोगों से संवाद करने और सीधे जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं । सामुदायिक पुलिसिंग का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि अपराध होने पर भी अपराधी तक पहुंचने में पुलिस को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ती क्योंकि सामुदायिक पुलिसिंग से पुलिस का सूचना तंत्र बहुत मजबूत हो जाता है। कई बार तो बड़ा अपराध घटित होने के पूर्व ही पुलिस को खबर लग जाती है और वह आसानी से अपना काम करके घटित होने वाले अपराध को घटित होने से पूर्व ही रोक देती है। पुलिस कमिश्नर की मंशा के अनुरूप जोन के डीसीपी से लेकर थानों के टीआई तक लगातार आम जन से संवाद कर रहे हैं। जिससे पुलिस और आमजन में विश्वास का माहौल भी तैयार हो रहा है जिसका असर आने वाले दिनों में पुलिस की वर्किंग में भी नजर आएगा ।                         

2006 बैच के आईपीएस अफसर भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार का काम करने का अंदाज थोड़ा अलग हटकर है। बालाघाट में आईजी के रूप में एंटी नक्सल ऑपरेशन को लीड कर नक्सलियों का खात्मा करने वाले संजय कुमार की निर्भीक और निडर कार्यशैली की सराहना केंद्रीय गृह मंत्रालय तक कर चुका है। इसी तरह उन्होंने शिवपुरी में भी एसपी रहते हुए डकैतों का सफाई कर दिया था । उनकी साफ - सुथरी, ईमानदार और बेदाग छवि के चलते ही उन्हें भोपाल की कमान सौंपी गई ।

 उनकी नजर से बड़े से बड़े अपराधी भी नहीं बच पाते हैं, महाभारत के संजय की तरह ही उनकी नजर सिर्फ अपराधियों पर ही नहीं बल्कि एक-एक थाने पर भी सीधी नजर होती है । उन्हें सब कुछ लाइव दिखता है, काम करने वाले पुलिस अफसर और काम ना करने वाले पुलिस अफसर भी उनकी नजर से बच नहीं पाते । पुलिस कमिश्नर संजय कुमार अपराध को सिर्फ कम करने का नहीं बल्कि मूलबिंदु यानि शून्य तक लाने का प्रयास करते हैं। वे 

हर दिन किसी न किसी बड़े टास्क को पूर्ण करने की रणनीति भी तैयार करते हैं और सुपर कॉप्स की तरह सही समय का इंतजार करते हैं फिर सफलतापूर्वक कार्रवाई करते हैं उनका वार कभी भी खाली नहीं जाता ।  ईरानी डेरा, अमन कॉलोनी में सफलतापूर्वक छापा मार कार्रवाई कर उन्होंने इसका उदाहरण भी दे दिया है । वे जिस मकसद से ईरानी डेरे पर गए थे, उसे पूर्ण करके ही वापस लौटे ।

 वैसे भी भोपाल उनके लिए नया नहीं है । नागरिकों से सीधा संवाद कर सामंजस्य बनाए रखने वाले भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार एक सफल टीम लीडर के रूप में काम करते हैं, टीम को सही नेतृत्व देकर सही दिशा में काम करने के लिए प्रेरित करते हैं और सही नेतृत्व ही सफलता के द्वार खोलता है।

भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार का कहना है कि भोपाल के नागरिक सकारात्मक और जागरूक हैं, पुलिस हर कदम पर उनके साथ है । आमजन को पुलिस से जरा भी भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है, पुलिस उनकी मित्र है । पुलिस और आमजन मिलकर ही एक अच्छे और अपराध मुक्त समाज के निर्माण में अहम भूमिका निभा सकते हैं l

जहां अर्जुन की तरह ही उनकी नजर भी कानून व्यवस्था रूपी चिड़िया की आंख पर ही होती है वहीं महाभारत के संजय की तरह ही उन्हें दिव्य दृष्टि भी प्राप्त है और उनकी इस दिव्य दृष्टि से कोई नहीं बच सकता । इतने कम समय में वह भोपाल के एक-एक पुलिस अधिकारी की कार्यशैली को भी समझ गए हैं और किस अधिकारी का किस भूमिका में उपयोग करना है, इस पर भी वे मंथन कर रहे हैं । आने वाले दिनों में कुछ बदलाव भी नजर आएंगे । वे पुलिस अधिकारियों को सरप्राइज भी कर रहे हैं, वह कभी भी, कहीं भी होते हैं। रात के 10:00 बजे से लेकर सुबह के 5:00 बजे तक भी वे यकायक कहीं भी प्रकट हो जाते हैं । यही वजह है कि 

फील्ड पर तैनात पुलिस अधिकारी चौकन्ने रहते हैं कि साहब कब कहां आ धमके, कोई भरोसा नहीं है और ऐसा होना भी चाहिए । वे पुलिस कमिश्नर होने के साथ-साथ आम जन की उम्मीदों के संजय भी हैं, जो भोपाल को विश्वस्तरीय पुलिस व्यवस्था देने के लिए प्रतिबद्ध और समर्पित भी नजर आ रहे हैं।