दुग्ध उत्पादन दोगुना करने की दिशा में भोपाल बना नवाचारों का मॉडल
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने के लक्ष्य को साकार करने के लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा भोपाल जिले में अनेक नवाचारों को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। विभाग की इन अभिनव पहलों का उद्देश्य पशुपालकों की आय में वृद्धि करना, उन्नत नस्ल के पशुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा डेयरी क्षेत्र को आत्मनिर्भर और लाभकारी बनाना है।
उपसंचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग डॉ. अभिजीत शुक्ला ने बताया कि जिले में उन्नत नस्ल के दुधारू पशुओं के स्थानीय बाजार को विकसित करने के लिए ब्रीडर एसोसिएशन का गठन किया गया है। वर्तमान में इस एसोसिएशन में 29 सदस्य शामिल हैं तथा इसके संचालन के लिए जिला स्तरीय ब्रीडर प्रकोष्ठ का गठन किया गया है, जिसमें दो शासकीय एवं छह अशासकीय सदस्य शामिल हैं। प्रकोष्ठ के अध्यक्ष श्री अजय सिंह राठौर हैं। इस पहल से पशुपालकों को स्थानीय स्तर पर कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले, स्थानीय जलवायु के अनुरूप तथा अधिक रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले पशु उपलब्ध हो सकेंगे। इससे अन्य राज्यों से पशु खरीदने में होने वाले परिवहन व्यय एवं समय की भी बचत होगी।
डॉ. शुक्ला ने बताया कि जिले में क्षीर धारा ग्राम योजना का प्रथम चरण 76 ग्रामों में संचालित किया जा रहा है। यह योजना पांच विभागों के समन्वित प्रयासों से क्रियान्वित की जा रही है। योजना के अंतर्गत पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण, पोषण प्रबंधन, नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण, निकृष्ट सांडों का बधियाकरण, बांझपन निवारण शिविर, पात्र पशुपालकों को किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराना, निराश्रित गौवंश का गौशालाओं में पुनर्वास, चारा विकास तथा जैविक खाद जैसी गतिविधियों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे गांवों में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ पशुधन प्रबंधन को भी सुदृढ़ बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से लखपति गौपालक दीदी योजना प्रारंभ की जा रही है। योजना के तहत अवर्णित गाय एवं भैंसों का गर्भाधान कराया जाएगा, जिससे उच्च उत्पादकता वाली बछिया एवं पड़िया प्राप्त होंगी। वैज्ञानिक पोषण एवं स्वास्थ्य प्रबंधन के साथ इन पशुओं से पारंपरिक नस्लों की तुलना में लगभग ढाई गुना अधिक दूध उत्पादन की संभावना है। इससे प्रत्येक पशुपालक को पशु के जीवनकाल में तीन से चार लाख रुपये तक का अतिरिक्त लाभ प्राप्त हो सकेगा।
डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के अंतर्गत जिले में मध्यम स्तर के डेयरी उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। वर्तमान में पांच पशुपालकों द्वारा 25-25 भैंसों एवं एक पशुपालक द्वारा 25 गायों की क्षमता वाले डेयरी प्रकल्पों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त पैक्स समितियों के माध्यम से 1200 पशुपालक कृषक सदस्यों को पशुपालन किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी जारी है, जिससे उन्हें पशुपालन गतिविधियों के विस्तार हेतु आवश्यक वित्तीय सहायता प्राप्त हो सकेगी। पशुपालन एवं डेयरी विभाग की ये पहलें जिले में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, आधुनिक पशुपालन को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।


