कठिनाईयों पर चलकर लिखा सफलता का इतिहास कल्पना प्रजापति बनीं असिस्टेंट लोको पायलट
रीवा। कहते हैं कि माँ-बाप का साया सिर पर न हो तो जिंदगी की राहें धुंधली हो जाती हैं। लेकिन अगर इरादे फौलादी हों तो किस्मत को भी अपना फैसला बदलना पड़ता है। कुछ ऐसी ही हैरतअंगेज और जज्बे से भरी कहानी है रीवा जिले के एक छोटे से गाँव बहुरीबांध की रहने वाली कल्पना प्रजापति की। कल्पना ने अपनी जिंदगी के सबसे कठिन दिनों को पार कर वो मुकाम हासिल किया है, जो आज लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल बन चुका है।
कल्पना की जिंदगी की शुरुआत ही संघर्षों के बीच हुई। जब वह इस दुनिया में आईं , तभी उनके सिर से माँ का साया हमेशा के लिए उठ गया। माँ के बिना बीता हर दिन एक इम्तिहान जैसा था, लेकिन पिता ने हमेशा अपनी बेटी की हिम्मत बनाए रखी। पिता के इसी हौसले के दम पर कल्पना ने रीवा आईटीआई से साल 2021-23 के बैच में अपनी पढ़ाई पूरी की। सब कुछ ठीक चल रहा था कि तभी साल 2024 में नियति ने उन पर एक और गहरा वार किया। एक दर्दनाक हादसे में करंट लगने के कारण उनके पिता का भी असमय निधन हो गया। जिस पिता के कंधों पर टिककर कल्पना अपने सपनों की उड़ान देख रही थीं, वही कंधा अब हमेशा के लिए छिन चुका था।
माता-पिता दोनों को खो देने के बाद कोई भी टूट सकता था, लेकिन कल्पना ने हार मानने से इंकार कर दिया। इस बेहद मुश्किल दौर में उनके आईटीआई के ट्रेनिंग ऑफिसर नरेंद्र द्विवेदी सर ने एक सच्चे गुरु की तरह उनका हाथ थामा। नरेंद्र सर के सही मार्गदर्शन और अपने पूरे परिवार के भावनात्मक सहयोग के दम पर कल्पना ने अपने आंसुओं को अपनी ताकत बना लिया। वह दिन-रात बिना थके, बिना रुके अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती रहीं। आखिरकार मार्च 2026 में कल्पना का चयन भारतीय रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट के पद पर हो गया। यह सिर्फ एक सरकारी नौकरी नहीं थी, बल्कि यह उन तमाम झंझावातों पर एक बेटी की जीत थी जिसने कभी परिस्थितियों के आगे घुटने नहीं टेके। अपनी इस ऐतिहासिक सफलता पर भावुक होते हुए कल्पना कहती हैं कि शुरुआत से ही मुश्किलें बहुत थीं, लेकिन मेरे गुरु नरेंद्र सर और मेरे पूरे परिवार ने मुझे कभी अकेले पड़ने नहीं दिया। आज मैं जो कुछ भी हूँ, उनके मार्गदर्शन और सहयोग की वजह से हूँ। मैं दिल से सबका धन्यवाद करती हूँ।
कल्पना प्रजापति की यह कहानी हमें सिखाती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, यदि आपके पास एक सही मार्गदर्शक हो और मन में कुछ कर गुजरने का अटूट विश्वास हो, तो आप अंधेरी से अंधेरी रात को पार कर सफलता का सूरज उगा सकते हैं। आज पूरा रीवा अपनी इस होनहार बेटी की कामयाबी पर गर्व कर रहा है।


