भोपाल । समाज के कमजोर वर्गों विशेष रूप से दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिकों के सशक्तिकरण के लिए निरंतर अथक प्रयास कर रहीं 2006 बैच की आईएएस अफसर सामाजिक न्याय विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली पोक्षें वायंगणकर कई जिलों में कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ भी रही हैं। वहां उनकी कार्यशैली ही कुछ ऐसी थी कि वहां के लोग उन्हें आज भी याद करते हैं। उन्होंने बीई, सिविल (गोल्ड मेडलिस्ट) पुणें यूनिवर्सिटी महाराष्ट्र से किया है, एमए इकोनॉमिक्स विक्रम यूनिवर्सिटी उज्जैन से किया और एमए राजनीतिक शास्त्र बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय से किया है । पढ़ाई ,योग और संगीत में विशेष रुचि रखने वाली श्रीमती वायंगणकर आयुष, ट्राईबल डिपार्मेंट और हस्तशिल्प एवं हथकरघा विभाग में भी कमिश्नर रही हैं। वर्तमान में प्रमुख सचिव के साथ-साथ वे कमिश्नर का प्रभार भी देख रही हैं। वहीं आरसीवीपी नरोन्हा अकादमी भोपाल में भी डायरेक्टर के पद पर काम कर चुकी हैं । उन्हें सर्विस के दौरान जबलपुर और भोपाल में काम करने का अवसर ज्यादा मिला। वे जबलपुर में एसडीएम, असिस्टेंट कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ के रूप में काम कर चुकी हैं। उनके पति निरंजन बी वायंगणकर आईपीएस अफसर हैं, वे वर्तमान में आईजी राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय में पदस्थ हैं। सामाजिक न्याय विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली पोक्षें वायंगणकर का मानना है कि दिव्यांगजन को दया या सहानुभूति की नहीं बल्कि समान अवसर की आवश्यकता है और सरकार का लक्ष्य है कि दिव्यांगजन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्राप्त कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें वहीं वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी सम्मान के साथ सुविधापूर्ण जीवन जीने के प्रयासों को सरकार सुलभ बनाने का काम कर रही है । वरिष्ठ पत्रकार तेजेंद्र भार्गव ने उनसे लंबी चर्चा की । प्रस्तुत हैं उस साक्षात्कार के मुख्य अंश...                      सवाल - आपकी शिक्षा कहां हुई और आपने भारतीय प्रशासनिक सेवा को ही क्यों चुना?

जबाव - मेरी स्कूली शिक्षा HHCP High School Pune में एवं 11वीं तथा 12वीं की शिक्षा COEP, Fergusson college Pune से हुई और Govt College of Engineering Pune से मैने B.E. (Civil) में Gold Medal प्राप्त किया।

मेरे द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा को इसलिए चुना गया क्योंकि इसमें अच्छा केरियर है और इस सेवा में अलग-अलग क्षेत्र में विभिन्न पदों पर काम करने का मौका मिलता है। जिससे समाज के लिए हम कुछ कर सकते है। और स्वयं job satisfaction प्राप्त कर सकते है।

सवाल - एक महिला अफसर होने के नाते क्या कभी आपको किसी तरह के भेदभाव या दिक्कतों का सामना करना पड़ा ?

जबाव - एक महिला अफसर होने के नाते मुझे भेदभाव का तो सामना नहीं करना पड़ा लेकिन मेरे पति भी भारतीय पुलिस सेवा में उच्च पद पर हैं जिस कारण से अलग-अलग स्थान पर पदस्थापना होने से बच्चे जब छोटे थे या कभी बच्चे बीमार पड़ते थे, तो काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। ऐसे समय में हमारे माता-पिता का बहुत सहारा मिला।

सवाल - आपके दृष्टिकोण से सफलता का मूलमंत्र क्या है ?

जबाव - मेरे दृष्टिकोण में सफलता के तीन मुख्य मंत्र हैं

1. Determination (दृढ़ निश्चय)

2. Dedication (समर्पण)

3. Discipline (अनुशासन)

सफलता के लिये सबसे पहले लक्ष्य तय करते हैं और उस लक्ष्य को पाने के लिये पूर्ण समर्पण के साथ प्रयास करों, लक्ष्य प्राप्ति हेतु कोई भी दिनचर्या में अनुशासन बहुत जरूरी है।

सवाल - सामाजिक न्याय विभाग का मुख्य लक्ष्य क्या है ?

जबाव - हमारा विभाग उनके लिये काम करता है जो सबसे वंचित लोग हैं जिन्हें वास्तव में सहारे की आवश्यकता है। जैसे कि वृद्ध, दिव्यांगजन, नशे से पीड़ित लोग, भिक्षुक, ट्रांसजेण्डर। इनको आवश्यकतानुसार सहायता करना और समाज की मुख्य धारा से जोड़ना ही विभाग का मुख्य लक्ष्य है।

सवाल - कुछ समय पहले मध्यप्रदेश पुलिस ने "नशे से दूरी है जरूरी" स्लोगन के साथ नशे से जागरूकता हेतु जन-जागरूकता अभियान चलाया था l उसमें सामाजि न्याय विभाग की कहीं भी किसी भी प्रकार की कोई सहभागिता नजर नहीं आई ?

जबाव - मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा चलाये गये नशे से जागरूकता हेतु जन-जागरूक अभियान में विभाग की ओर से "नशे से दूरी है जरूरी" स्लोगन के साथ प्रिंटेड टी-शर्ट पुलिस विभाग के कर्मचारियों को वितरित कर विभाग द्वारा सहभागिता दी गई।

नशे से जागरूकता के संबंध में विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पुलिस विभाग के कर्मचारियों को माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा सम्मानित कराया गया। साथ ही विभाग द्वारा आयोजित नशे से जागरूकता हेतु प्रत्येक कार्यक्रम में पुलिस विभाग को शामिल किया जाता रहा है।

सवाल - सामाजिक न्याय विभाग में शिकायतों के निवारण और पारदर्शिता के लिए आपके द्वारा क्या कुछ कदम उठाए जा रहे है?

जबाव - यदि लोगों का काम तत्समय ही किया जाये तो शिकायतें उद्भूत ही नहीं होगी। विभाग से संबंधित प्राप्त शिकायतों के निराकरण के लिये प्रतिदिन अधिकारियों के साथ बैठक ली जाती है। दिव्यांगजनों हेतु हेल्पलाईन प्रारंभ की गई है। सीएम हेल्पलाईन पर प्राप्त शिकायतों की भी समय-समय पर समीक्षा कर शिकायतों का निराकरण किया जाता रहा है। जिसमें विभाग हमेशा टॉप-5 में रहा है। हमारे यहां आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाईन रहती है जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।

सवाल - अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आप महिलाओं को क्या संदेश देना चाहेंगी?

उत्तर- मैं पुणे (महाराष्ट्र) से हूं। भारत की प्रथम महिला शिक्षक अध्यापक सावित्री बाई फुले, महात्मा ज्योतिराव फुले जिन्होंने स्त्री शिक्षण भिडेवाडा से शुरू किया और जहां महर्षि धोंडो केशव कर्वे ने महिलाओं के उच्च शिक्षा के लिए महाविद्यालय और छात्रावास यहां शुरू किये, और रमाबाई रानडे जी ने महिलाओं के लिये सेवा सदन की स्थापना की। इन सभी के प्रति में कृतज्ञता व्यक्त करती हूं कि जिनके वजह से उन्हें पढ़ने, लिखने और आगे बढ़ने का अवसर मिला और समाज की महिलाओं को यही संदेश देना चाहूंगी कि वे भी जहां संभव हो अन्य सभी महिलाओं को भी आगे बढ़ने के लिये प्रोत्साहन दें।