छिंदवाड़ा l जिले में नवाचार करते हुये अत्याधुनिक व वैज्ञानिक पध्दति से खेती करने के प्रति कृषकों का रूझान बढ़ा है तथा वे नई तकनीकों का उपयोग कर अपनी फसलों का विपुल उत्पादन लेते हुये आर्थिक रूप से समृध्द हो रहे हैं । इसी तारतम्य में छिंदवाड़ा जिले के विकासखंड तामिया के ग्राम देलाखारी के कृषक श्री नरेश राय भी अपनाई गई नई तकनीक और नवाचार के द्वारा खेती कर लाभ प्राप्त कर रहे हैं । उन्होंने नवाचार करते हुये श्री पध्दति अपनाकर धान की खेती की और उन्हें प्रति हेक्टेयर 93 क्विंटल की धान की फसल लेने पर आत्मा परियोजना का राज्य स्तरीय सर्वोत्तम कृषक पुरूस्कार मिला है जिससे उनके मान-सम्मान में भी बढ़ोतरी हुई है ।
       कृषक श्री नरेश राय बताते हैं कि मेरे द्वारा पूर्व में छिड़कवा पध्दति से धान बोया जाता था, किन्तु मुझे यह नहीं पता था कि कितनी मात्रा में उर्वरक देना हैं और क्या पध्दति अपनाना है जिससे अधिक उपज प्राप्त हों। मेरे द्वारा खेती के लिये परंपरागत तरीके ही अपनाये
जा रहे थे । मेरे मन में नई तकनीक और नवाचार से खेती से लाभ लेने की कामना थी, जिसके कारण मेरे द्वारा कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया गया तो उनके द्वारा श्री पध्दति से धान लगाने की सलाह दी गई। इस सलाह पर मेरे द्वारा वैज्ञानिक पध्दति और मापदण्डों के आधार पर नत्रजन, फास्फोरस व पोटाश का खेती में प्रबंधन किया गया और खरपतवार नियंत्रण के लिये कोनोवीडर चलाया गया । अंत में रासायनिक पध्दति भी अपनाई गई और इस प्रकार पूर्ण वैज्ञानिक ढंग से धान की खेती आत्मा परियोजना और कृषि अधिकारियों के मार्गदर्शन में की गई। इस वैज्ञानिक खेती में समय-समय पर उप संचालक कृषि श्री जितेन्द्र कुमार सिंह द्वारा धान के खेतों का निरीक्षण कर आवश्यक सलाह और सुझाव दिये गये जिससे धान की खेती का विपुल उत्पादन लिया गया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में मेरे द्वारा 5 एकड में धान की फसल लगाई गई थी जिसमें से एक हेक्टेयर में बासमती धान की उपज से मुझे 73 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त हुई तथा एक हेक्टेयर में मेरे द्वारा क्रांति किस्म की धान लगाई गई जिससे मुझे 93 विवंटल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त हुई। इस फसल के आधार पर मुझे आत्मा परियोजना द्वारा राज्य स्तरीय सर्वोत्तम कृषक पुरस्कार से सम्मानित किया गया था जिससे समाज में मेरे मान-सम्मान में बढ़ोतरी हुई है। वे अब सभी कृषकों को नवाचार करते हुये नई वैज्ञानिक पध्दति और श्री पध्दति से धान की खेती करने की सलाह दे रहे हैं जिससे उन्हें भी फसल का अच्छा उत्पादन प्राप्त हो सके।