पड़त भूमि में खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करें- कमिश्नर

कमिश्नर शहडोल संभाग श्री बीएस जामोद ने कहा है कि किसानों की उन्नति और प्रगति के लिए किसानों तक आधुनिक कृषि, पशुपालन, मछलीपालन, बकरी पालन एवं उद्यानिकी फसलों की आधुनिकतम कृषि तकनीक पहुचाएं। कमिश्नर ने कहा है कि शहडोल संभाग के किसानों को आधुनिकतम कृषि तकनीक का लाभ मिलना चाहिए। उन्हानें कहा है कि शहडोल जिले में लगभग 65 हजार हेक्टेयर पड़त भूमि है। इस भूमि से किसानों को कोई लाभ नहीं हो रहा है। कमिश्नर ने कहा कि शहडोल जिले में पड़त भूमि पर भी किसानों को खेती करने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करें। पड़त भूमि में किस प्रकार खेती की जा सकती है इसकी जानकारी किसानो तक पहुंचाएं। किसानांे को कम लागत में अच्छी फसल के लिए जैविक खाद के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करें। किसानों को वर्मिगकम्पोस्ट बनाना भी सिखाएं। उन्होनें कहा है कि किसानेां को पशुपालन, मत्सपालन एवं उद्यानिकी खेती करने के लिए भी प्रोत्साहित करेें। कमिश्नर ने कहा है कि पशुपालन हमारी गौरवशाली परंपरा रही हैं। पशुपालन को पुनः पोशित करने की आवश्यकता है। उन्होनें कहा कि मत्स्यपालन से किसान एक एकड़ भूमि में कई गुना जादा आय अर्जित कर सकता है, यह संदेश किसानों तक पहुंचना चाहिए। कमिश्नर ने कहा है कि कृषि विभाग उद्यानिकी विभाग, मत्स्यपालन विभाग, पशुपालन विभाग के बीच समन्यवय होना चाहिए। तभी हम किसानों को आर्थिक रूप से समृद्ध बना सकते हैं। कमिश्नर शहडोल संभाग श्री बीएस जामोद आज कंचनपुर में आयोजित एक दिवसीय कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी एवं मत्स्यपालन विभाग के मैदानी अधिकारियों, कर्मचारियों के संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबंोधित कर रहे थे। कमिश्नर ने कहा कि शहडोल संभाग के किसानों को समृद्ध बनाने के लिए कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन एवं मत्स्यपालन विभाग के अधिकारियेां, कर्मचारियों को समन्वित रूप से प्रयास करनें होंगे। कमिश्नर ने कहा कि मैदानी अधिकारी, कर्मचारी ग्रामीण क्षेत्रों में जाएं, किसानों से जीवन्त सम्पर्क स्थापित करे तथा किसानों की कृषि के प्रति मानसिकता में बदलाव लाएं। उन्होंने कहा कि हम सभी किसानों के विकास के लिए हैं, हम सब को मिलकर काम करना होगा। हम सब को मिलकर किसानों का मार्गदर्शन करना होगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्री तरूण भटनागर ने कहा कि हम सबका दायित्व कृषि की गतिविधियों को आगे बढ़ाना है। हम लक्ष्य आधारित काम करते हैं, हमे इससे ऊपर उठकर किसानों के सर्वांगीण विकास के विषय में कार्य करना होगा। उन्होनें कहा कि खेती से कृषको को भी फायदा हो और इससे जुड़े अन्य लोगों को भी फायदा हो, इस पर ध्यान केन्द्रित करना होगा। कलेक्टर ने कहा कि अरहर की पूषा-16 किस्म और धान की कई उन्नत किस्में हैं जिन्हें शहडोल जिले में प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है, वहीं तिलहन और दलहन मिशन से शहडोल जिले के किसानो को कैसे फायदा हो सकता है इस पर भी कार्य करने के आवश्यकता है। कलेक्टर ने कहा कि शहडोल जिले में कई पुरानी जल संरचनाएं हैं इन संरचनाओं का जीर्णोद्धार कर यहां मत्स्यपालन भी किया जा सकता है। शहडोल जिले के किसानो को मोती की खेती, मुर्गीपालन, बकरी पालन, हल्दी की खेती, नीबू और पपीते के खेती करने के लिए भी प्रोत्साहित करें। उन्होनें कहा कि शहडोल जिले में फूलों की खेती, लेमन ग्रास की खेती, स्टीविया की खेती से कैसे अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है इसके संबंध में भी किसानों तक जानकारी मैदानी अधिकारी, कर्मचारी पहुंचाएं। प्रशिक्षण कार्यशाला को संयुक्त संचालक पशु चिकित्सा डॉ राजेश मिश्र ने संबोधित करते हुए कहा कि किसानों में पशुपालन के प्रति अरूचि बढ़ी है। हमें किसानों को पशुपालन के लिए प्रोत्साहित करना होगा। प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित करते हुए संयुक्त संचालक कृषि श्री जेएस प्रेन्द्राम ने बताया कि एक दिवसीय कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी एवं मत्स्यपालन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में आगामी खरीब सीजन के लिए आदान व्यवस्था, अभिलेखों के संधारण, आधुनिक कृषि, उद्यानिकी, मत्स्यपालन और पशुपालन की तकनीकी के प्रचार-प्रसार के विषय में अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना है। एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, एवं मत्स्यपालन विभाग के अधिकारियेां और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया।