सैनिक और पत्रकार
में कुछ समानताएं हैं।

सैनिक सरहद पर देश के दुश्मन से
और
पत्रकार देश के अंदर
के दुश्मन भ्रष्टाचारियों
से लड़ता है!

सैनिक के हाथों में बंदूक
और
पत्रकार के हाथों में कलम होती है !

बस अंतर इतना है!

पत्रकार की कलम और कमर तोड़ने, आवाज़ दबाने के लिए 
सरकार और विपक्ष
षड्यंत्र करते हैं।

सरकार चाहती है
पत्रकार, सरकार की पायल के घुंघरू बनें 
और
विपक्ष चाहता है
पत्रकार
इंकलाब लाए।

सच तो यह है
सत्ता के ऐरावत
मद मस्त हैं!
और
विपक्ष नतमस्तक है
सत्ता के ऐरावतों के आगे!
बस
पत्रकार की 
कलम और आवाज़ से ही लोकतंत्र बचा है!
नहीं तो खादी वाले कब का देश बेच देते!

हरीश मिश्र
( स्वतंत्र पत्रकार )