मौजूद पोषक तत्वों की वजह से रागी एक आदर्श खाद्यान्न

जबलपुर l रागी लघुधान्य फसलों में से एक है, जो हमारे जीवन में बहुत ही लाभदायक पोषक तत्व है। यह देखने में बिल्कुल सरसों जैसा लगता है। इसको अंग्रेजी में फिंगर मिलेट्स और भारत में नाचनी बोला जाता है। रागी अपने अमीनो एसिड मिथियोनाइन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। जो अक्सर स्टार्च से भरपूर खाने पर निर्भर करते हैं। जैसे कसाव, कच्चे केले, पॉलिश किए हुए चावल और मकई। प्रोटीन, केल्सियम, रेसांक और लोहा से भरपूर रागी का प्रयोग विश्व भर में विभिन्न खाद्य पदार्थ में किया जाता है। अंग्रेजी में इसे फिगर मिलेट कहते है। यह शुष्क क्षेत्र में उपजने वाला, वर्ष भर उत्पन्न देने वाला अनाज का पौधा है, जो खासकर दक्षिण भारत में पाया जाता है। इस अनाज में प्रोटीन, कैल्शियम अधिक मात्र में होता है। इस धान्य में सभी आवश्यक एमिनो एसिड्स, विटामिन ए, बी, तथा फास्फोरस जो हमारे शरीर के विकास के लिए चाहिए, संतुलित मात्र में उपलब्ध है। इस अनाज में उपलब्ध अधिक रेशे की मात्रा, उदर विकार, उच्च रक्तचाप तथा आँतों के कैंसर से हमारे शरीर की रक्षा करती है। सामान्यतः रागी दक्षिण भारत की रसोई में सदैव उपलब्ध होता है। यह चावल व गेहू से दस गुणा अधिक कैल्शियम व लोह का स्त्रोत है, जिसकी वजह से यह बच्चों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण खाद्यान्न बन गया है। इसमें स्थित अधिक प्रोटीन, कुपोषण से लड़ने के लिए शरीर को सक्षम बनता है तथा इसकी शर्करा के स्तर को एवं मधुमेह को नियंत्रित रखने की क्षमता की वजह से रागी एक आदर्श खाद्यान्न है। संयुक्त संचालक कृषि श्री केएस नेताम ने बताया कि रागी से लड्डू, बालूशाही, उपमा पकौड़ी, चीका, चपाती, सिवैयां की खीर व चकली आदि विभिन्न तरीकों से बनाया जाता है। रागी में मौजूद पोषक तत्वों के कारण आज-कल बहुतायत लोग इसे अपने भोजन में शामिल करते हैं।