जबलपुर l किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने धान की फसल में प्राकृतिक नाइट्रोजन की पूर्ति के लिये किसानों को अजोला का उपयोग करने की सलाह दी है । किसानों को बताया गया है कि अजोला एक जैव उर्वरक है और रोपाई के पहले धान के खेतों में इसे डालकर से 5 से 15 प्रतिशत तक उत्पादन बढाया जा सकता है ।

किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के उप संचालक रवि आम्रवंशी के ने बताया कि अजोला एक तैरती हुई फर्न है, जो शैवाल से मिलती-जुलती है। उन्होंने बताया कि सामान्यतः अजोला धान के खेत या उथले पानी में उगाई जाती है। यह तेजी से बढ़ती है। अजोला एक जैव उर्वरक है। एक तरफ जहाँ इसे धान की उपज बढ़ती है वहीं ये कुक्कुट, मछली और पशुओं के चारे के काम आता है। अजोला पानी में पनपने वाला छोटे बारीक पौधों की जाति का होता है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में फर्न कहा जाता है। अजोला की पंखुड़ियो में एनाबिना नामक नील हरित काई के जाति का एक सूक्ष्मजीव होता है, जो सूर्य के प्रकाश में वायुमण्डलीय नत्रजन का यौगिकीकरण करता है और हरे खाद की तरह फसल को नत्रजन की पूर्ति करता है।

उपसंचालक किसान कल्याण के अनुसार अजोला की विशेषता यह है कि यह अनुकूल वातावरण में 5 दिनों में ही दो-गुना हो जाता है। यदि इसे पूरे वर्ष बढ़ने दिया जाये तो 300 टन से भी अधिक सेन्द्रीय पदार्थ अर्थात 40 किलोग्राम नत्रजन प्रति हेक्टेयर पैदा किया जा सकता है । अजोला में 3 से 5 प्रतिशत नत्रजन तथा कई तरह के कार्बनिक पदार्थ होते हैं, जो भूमि की ऊर्वरा शक्ति बढ़ाते हैं। धान के खेतों में इसका उपयोग सुगमता से किया जा सकता है । दो से चारों इंच पानी से भरे खेत में दस टन ताजा अजोला को रोपाई के पूर्व डाल दिये जाने से धान की फसल में लगभग पाँच से पन्द्रह प्रतिशत तक उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है। इस फर्न का रंग गहरा लाल या कत्थई होता है। धान के खेतों, छोटे-छोटे पोखर या तालाबों में यह अक्सर दिखाई देती है।

अजोला बनाने की विधि:-

उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास ने बताया कि पानी के पोखर या लोहे के ट्रे में अजोला कल्चर बनाया जा सकता है। पानी की पोखर या लोहे के ट्रे में 5 से 7 सेंटीमीटर पानी भरकर उसमें 100 से 400 ग्राम कल्चर प्रतिवर्ग मीटर की दर से पानी में मिलाने से सही स्थिति रहने पर अजोला कल्चर बहुत तेज गति से बढ़ता है और 2 से 3 दिन में ही दुगना हो जाता है। अजोला कल्चर डालने के बाद दूसरे दिन से ही एक ट्रे या पोखर में अजोला की मोटी तह जमना शुरू हो जाती है, जो नत्रजन स्थिरीकरण का कार्य करती है। इस प्रकार अजोला का उपयोग करके किसान कम रासायनिक ऊर्वरक का उपयोग करके भी अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं