प्राकृतिक खेती से 02 एकड़ खेती में प्राप्त हुआ 70 टन गन्ने का उत्पादन

छिंदवाड़ा l वर्तमान में फसलों में कीटनाशकों, खरपतवार नाशकों और उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से लगातार भूमि की उर्वरा क्षमता कम होती जा रही है। अनाज, फलों एवं सब्जियों आदि की गुणवत्ता भी गिरती जा रही है और इनके सेवन से अनेक गंभीर बीमारियां घेरती चली जा रही हैं। इन सभी समस्याओं के समाधान के रूप किसान प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। इन्हीं प्रगतिशील किसानों में से एक छिन्दवाड़ा जिले के विकासखण्ड जुन्नारदेव के सुदूर अंचल के ग्राम छिन्दीकामथ के कृषक श्री रामजी यदुवंशी द्वारा प्राकृतिक खेती पध्दति से गन्ने की फसल ली जा रही है। कृषक श्री रामजी द्वारा कृषि विभाग व आत्मा परियोजना के अधिकारियों के मार्गदर्शन में विगत 3 वर्षों से प्राकृतिक खेती से गन्ने की उन्नत किस्म की खेती रेज्ड बेड पध्दति से की जा रही है। कृषक द्वारा अपने खेत में ही प्राकृतिक खेती की सभी यूनिट स्थापित कर जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, ब्रम्हास्त्र, बायोगैस स्लरी, गोबर की खाद एवं केंचुआ खाद का उत्पादन किया जा रहा है। उन्हें विगत वर्ष 2 एकड़ खेती में 70 टन गन्ने का उत्पादन प्राप्त हुआ है, जिससे उन्हें कुल 2.5 लाख रूपये की शुध्द आय प्राप्त हुई।
कृषक श्री रामजी ने बताया कि पूर्व में वे परंपरागत तरीके से खेती करते थे, जिससे रसायनों के प्रयोग से साल दर साल उनके खेत की मिट्टी की उर्वरा क्षमता कम होती जा रही थी। लेकिन विगत 3 वर्षों से जैविक एवं प्राकृतिक खेती करने से उनके खेत की मिट्टी में सुधार आया है। साथ ही उनके खेत में केंचुए की संख्या में भी वृध्दि हुई है और मिट्टी की जल धारण क्षमता भी बढ़ी है। कृषक ने बताया कि प्राकृतिक खेती के समस्त घटकों का इस्तेमाल करने के कारण फसल में किसी भी प्रकार के कीटों का प्रकोप नहीं हुआ है और उन्हें विगत वर्ष 02 एकड़ में 70 टन गन्ने का उत्पादन प्राप्त हुआ। जुन्नारदेव के अन्य कृषक भी श्री रामजी से प्रेरित होकर प्राकृतिक खेती को अपना रहे हैं। उप संचालक कृषि श्री जितेंद्र कुमार सिंह ने भी अन्य कृषि अधिकारियों के साथ उनके खेत का बीते दिनों निरीक्षण किया और उनके द्वारा प्राकृतिक खेती के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की है।