डिंडौरी l फसल के अच्छे उत्पादन लिए कृषि विभाग की सलाह मूंग एवं उड़द अतिरिक्त पानी के निकास की व्यवस्था करें। मूंग एवं उड़द में इस समय रसचूसक कीटो (माहू, जैसिड, थ्रिप्स एवं सफेद मक्खी) की संभावना हो सकती है। अतः दिखाई देने पर इसके नियंत्रण हेतु डाइमिथोएट 30 ई.सी. @ 2 मि.ली. / लीटर या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल- @0.2 मि.ली. / लीटर या फिप्रोनिल 5% एस.सी. @ 2 मि. ली./लीटर की दर से प्रति हैक्टर 500 लीटर पानी में घोल बनाकर 10-15 दिन के अन्तराल से दो बार छिड़काव करें। मूंग की फसल को पर्णदाग रोग से बचाने के लिए मेन्कोजेब फफूंदनाशी का छिड़काव 3 ग्राम / लीटर पानी की दर से करें। अरहर * जल निकासी की उचित व्यवस्था करें। * अरहर में बुवाई के 30 और 45 दिन बाद खुरपी या हस्तचिलत हा द्वारा निंदाई-गुड़ाई करनी चाहिए जिससे खरपतवार नियंत्रण हो जाये। साथ ही साथ मिट्टी मे पर्याप्त वायु संचार बना रहे। मक्का * मक्का में अनुसंशित नत्रजन उर्वरक की 1/3 मात्रा यूरिया के रूप में फसल में 08 पत्तियाँ होने पर (बुवाई के 25-30 दिन बाद) व 1/3 नत्रजन की मात्रा फसल पुष्पन अवस्था (सिल्किंग) में हो या फूल (टेसलिंब) आने के समय देना चाहिए। * फॉल आर्मी वर्म का अधिक नुकसान होने पर स्पिनेटारम 11.7 एस.सी. का 0.5 मिली/लीटर पानी या क्लोरेंट्रानिलिप्रोएल 18.5 एस.सी. का 0.4 मिली/लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। * मक्का की पत्तियों में झुलसन होने पर मेन्कोजेब फफूंदनाशक का 2 ग्राम/लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर छिड़काव 15 दिनों के अन्तराल में 2 बार करना चाहिए। सोयाबीन * अधिक वर्षा होने की स्थिति में सालह है कि अतिरिक्त पानी के निकास की व्यवस्था करें।   * गर्डल बीटल के नियंत्रण हेतु प्रारम्भिक अवस्था में ही टेट्रानिलिप्रोल 18.18 एस.सी. (200-300 मिली/लीटर) हेक्टयेर या थायक्लोप्रीड 21.7 एस.सी. (750 मिली/हेक्टेयर) या प्रोफैनोफॉस 50 ई.सी. (1 लीटर / हेक्टेयर) या इमामैक्टीन बेन्जोएट (425 मिली / हेक्टेयर) का 500 लीटर पानी के साथ घोल बनाकर छिड़काव करें। * गर्डल बीटल तथा पत्ती खाने वाली इल्लियों के साथ नियंत्रण हेतु पूर्व मिश्रित कीटनाशक क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 9.30%+ लेम्बड़ा सायहेलोथ्रिन 4. 60% जेड.सी. (200 मिली/ हेक्टेयर) या बीटासाइफलोथ्रिन का 500 लीटर पानी के साथ घोल बनाकर छिड़काव करें।