कृषि विज्ञान केंद्र टीकमगढ़ के डॉ बी.एस. किरार वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख के मार्गदर्शन में डॉ. आर.के. प्रजापति नोडल अधिकारी( मशरूम प्रशिक्षण) एवं जयपाल छिगारहा द्वारा विकसित भारत संकल्प 2047 अंतर्गत 100 दिवसीय कार्य योजना अंतर्गत पांच दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण संपन्न कराया गया। केंद्र द्वारा 2019-20 से कृषि में नवाचार के रूप में मशरूम उत्पादन के कौशल विकास प्रशिक्षण को एक जलवायु परिवर्तन के दौर में कृषि में जुड़े व्यवसाययों पर प्रशिक्षण करता आ रहा है जिससे अब जिले में मशरूम का उत्पादन बहुत लोग करने लगे हैं। वर्तमान में दो महिलाएं स्वा-सहायता समूह और एक स्वयं कृषि फार्म द्वारा मशरूम के उत्पादन में लगे हुए हैं।
मशरूम की शुरुआत टीकमगढ़ में पहले धीमी हुई जहां पहले लोगों की सोच में मशरूम को एक कुकुरमुत्ता तक सीमित थी। वही आज लोगों को मशरूम आकर्षित करता हुआ नजर आ रहा है। चूँकि मशरूम को लेकर लोगों में जागरूकता आई है। साथ ही मशरूम अध्ययन टीकमगढ़ के लोगों को आसान आय के साधन एवं स्वास्थ्य वर्धक है।
मशरूम उत्पादन के लिए टीकमगढ़ जिले की जलवायु अनुकूल है। यहां पर उपस्थित फसलों के भूसे जैसे गेंहूँ, उर्द, सोयाबीन, चना, मसूर, एवं मटर इत्यादि पर उगने की क्षमता एवं मशरूम उगाने की सरल विधि के कारण तेजी से लोगों को आकर्षित कर रहा है। मशरूम खाने से होने वाले स्वास्थ्य लाभों के बारे में भी लोगों में जागरूकता हो रही है। अभी तक टीकमगढ़ में डिंगरी(ओयस्टर), बटन और दूधिया मशरूम की खेती सफलतापूर्वक की जा चुकी है और आने वाले समय में महंगे मशरूम की खेती पर केंद्र द्वारा शोध किया जा रहा है। मशरूम की खेती भूमिहीन लोग एक छोटे से कमरे में 250-300 रुपये लगाकर शुरुआत कर सकते हैं।
 टीकमगढ़ जिले में कृषकों, युवा, महिला जिसको भी मशरूम  उत्पादन में रुची है वो कृषि विज्ञान केंद्र में अपना नाम पंजीकृत करवा सकते है, जिससे जब भी मशरूम प्रशिक्षण होगा वह उसमें सम्मिलित हो सकता है।