उमरिया । सहायक कृषि यंत्री ने बताया कि पराली अथवा नरवाई जलाने से पर्यावरण को नुकसान तो पहुंचता है। लोगो को भी तमाम स्वा0 संबंधी दिक्कतें होती है। सबसे अधिक इससे मिटटी को नुकसान पहुंचता है। पराली जलाना किसानों की मजबूरी हो सकती है पर जलाने के स्थान पर यदि वे उसके प्रबंधन के प्रति गंभीर हो जाए तो होने वाले नुकसान से तो बचा ही जा सकता है, साथ ही यह उपज वृद्धि में भी सहायक होगा। फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिये इन कृषि यंत्रों का सहारा लिया जा सकता है फसल अवशेषों को उपयोगी बना देते है। जीरोटिलेज हैप्पी सीडर उपकरण हार्वेस्टर द्वारा छोडे गये फसल अवशेषों के बीच ही बिना जुताई सीधे अगली फसल की बुवाई कर देता है। पूर्व फसल के अवशेष खेत को ढके रहते है जो की मल्चिंग का कार्य करता है। नमी संरक्षित रहती है व खरपतवार को भी नियंत्रित कर समय से बोनी की जा सकती है। सुपर सीडर उपकरण हार्वेस्टर द्वारा छोड़े गये फसल अवशेषों को बारिक कर मिट्टी में मिला देता है साथ-साथ बोवनी भी कर देता है यह उपकरण सिंगल ऑपरेशन में तीन कार्य करता है । जिससे समय की बचत,बीच व डीजल की खपत में कमी व खेतों नमी का संरक्षण,मिट्टी में आर्गेगिक तत्वोंप की वृद्धि होती है। स्ट्राबेलर उपकरण फसल अवशेषों के बेल्स ( ठोस आयताकार अथवा बेलनाकार) तैयार कर उन्हें भली-भांति बांध देता है। बेलनाकार बेल्स तैयार करने वाला उपकरण राउण्ड बेलर कहलाता है जो 120 से 180 सेंटीमीटर व्यास के डेढ मीटर लंबाई तक के ठोस बेल्स तैयार कर देता है। आयताकार बेल्स तैयार करने वाला उपकरण स्ववेयर बेलर के नाम से उपलब्ध है जो पृथक-पृथक मॉडल अनुसार ठोस बेल्स तैयार करता है। स्लैशर और श्रेडर उपकरण फसल अवशेषों के बारीक कण बनाकर उन्हेंत खेत में मिला अथवा बिछा देते है। ये भी नमी संरक्षण, आर्गेनिक तत्वों की वृद्धि तथा खरपतवार नियंत्रण में सहायक होते है। स्ट्रारेक उपकरण हार्वेस्टर द्वारा खेत में फैलाये गये फसल अवशेषों को कतारों में एकत्रित कर देता है। जिसे बेलर की सहायता से खेतों से हटाया जा सकता है। समस्त कृषि यंत्रों पर शासन द्वारा अनुदान देय है आवेदन ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टलwww.mpdage.org पर किया जा सकता है ।