रबी फसलों की सिंचाई हेतु सुझाव

डिंडौरी l वर्तमान में रबी सीजन हेतु फसलों जैसे गेंहू, चना, मटर, मसूर इत्यादि की बुवाई का कार्य जारी है बुवाई के पश्चात उत्तम फसल एवं पैदावार हेतु सिंचाई की आवश्यकता है। सिंचाई कृषि की वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा हम विभिन्न श्रोतों से समय-समय पर खेतों में लगी फसलों के जल की आवश्यकता की पूर्ति करता है, ताकि फसल सूखने न पाये एवं अच्छी पैदावार हो। अतः कृषकों को परामर्श दिया जाता है, कि विभिन्न रबी फसलों की सिंचाई क्रांतिक अवस्थाओं के आधार पर करें। जिसके अनुसार गेंहू की अधिकतम उपज प्राप्त करने हेतु हल्की भूमि में जल की उपलब्धता के आधार पर सिंचाईयों निम्न अवस्थाओं में करें, अन्यथा इन अवस्थाओं में जल की कमी का उत्पादन एवं उसकी गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ेगा। सिंचाई सदैव हल्की ( 6से.मी. गहरी) करें। पहली सिंचाई ताज मूल वृद्धि अवस्था में करें, यह अवस्था आमतौर पर बीज बौने के 20-25 दिन बाद आ जाती है। दूसरी सिंचाई कल्ले फूटने की अवस्था में करें। यह अवस्था आमतौर पर बीज बोने के 40-50 दिन बाद आ जाती है। तीसरी सिंचाई दीर्घ संधि अथवा गाँठ निर्माण की अवस्था में करें यह अवस्था बीज बोने के 60-65 दिन बाद आती है। चौथी सिंचाई पुष्पावस्था में सिंचाई करें। यह अवस्था बीज बोने के 80-85 दिन बाद आती है। पाँचवी सिंचाई दुग्धावस्था में सिंचाई करें। यह अवस्था बीज बोने के 100-105 दिन बाद आ जाती है। छठी सिंचाई दाने भरने की अवस्था में सिंचाई करें, यह अवस्था बीज बोने के 115-120 दिन बाद आ जाती है। मटर पहली सिंचाई फूल आने के समय पर सिंचाई करें। दूसरी सिंचाई दाने भरते समय करें, ऐसा करने से अधिक उपज मिलती है। मसूर पहली सिंचाई फूल आने के समय सिंचाई करें। दूसरी सिंचाई फलियों के निर्माण के समय सिंचाई करें। शरद कालीन वर्षा हो तो सिंचाई करने की आवश्यकता नहीं है। राई/सरसों इन फसलों की फसल अवधि में 25-30 से.मी. पानी की आवश्यकता होती है और केवल 2-3 सिंचाई पर्याप्त होती है। पहली सिंचाई फूल आने की अवस्था में बोने के 40-45 दिन बाद सिंचाई करें। दूसरी सिंचाई फली निर्माण की अवस्था में बोने के 80-85 दिन बाद सिंचाई करें। तीसरी सिंचाई फलियों में दाने भरने की अवस्था में बोने के 105-110 दिन बाद सिंचाई करें।