माननीय ! डॉ गौरीशंकर शेजवार जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं 🎉 🎉 🎉 

दिव्य चिंतन (हरीश मिश्र)

    एक गांव में एक कुशल मूर्तिकार था। उसका बेटा अक्सर उसे साधारण पत्थरों से सुंदर मूर्तियां बनाते देखता। एक दिन उसने पूछा, “पिता जी, आप इतनी सुन्दर मूर्ति कैसे बनाते हैं ?”
    पिता ने मुस्कुराते हुए एक पत्थर लिया और उसे तराशने लगे। बेटा उत्सुकता से देखता रहा। जब पत्थर पर चोटें पड़ने लगीं, तो उसने पूछा, “आप इसे क्यों तोड़ रहे हैं?”
    पिता ने जवाब दिया, “हर चोट से पत्थर का वह हिस्सा हटता है, जो इसकी सुंदरता को छिपा रहा है। जब यह पूरा हो जाएगा, तो एक अद्भुत मूर्ति उभरकर सामने आएगी।”
   कुछ समय बाद एक भव्य मूर्ति तैयार थी। बेटा चकित होकर बोला, “यह मूर्ति तो पहले पत्थर में कहीं नहीं दिख रही थी!”
   पिता ने कहा, “मूर्ति पत्थर में हमेशा से थी, लेकिन उसे बाहर लाने के लिए धैर्य, दृष्टि और दृष्टिकोण चाहिए।”
    यह कहानी डॉ. गौरीशंकर शेजवार ( पूर्व मंत्री, पूर्व नेता प्रतिपक्ष ) के व्यक्तित्व को समझने का मार्ग दिखाती है। उनके व्यक्तित्व को एक भव्य मूर्ति की तरह देखा जा सकता है, जिसे उन्होंने वर्षों के राजनैतिक संघर्ष, संगठन के प्रति समर्पण और तप से गढ़ा है।
   डॉ शेजवार की कथनी और करनी में समानता, स्वघोषित सिद्धांत और कड़क आवाज़ उनकी विशेषता है। उनकी वाणी में ओज,  पैनापन, विचारों में गहराई और व्यापकता है ।
    आज राजनीति में  राजनेता तत्कालिक आंशिक लाभ के लिए समझौता कर लेते हैं। तब ऐसी परिस्थितियों में स्वघोषित सिद्धांतों के प्रति समर्पित राजनीति करना आसान बात नहीं है। कभी-कभी तो यह गुणवत्ता जोखिम से भी खाली नहीं होती। 
    उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि हर इंसान में कुछ अद्भुत छिपा होता है। लेकिन उसे निखारने के लिए कठिन परिश्रम और सही मार्गदर्शन की जरूरत होती है। चाहे राजनीतिक चुनौतियां हों या सामाजिक जिम्मेदारियां, डॉ. शेजवार ने हर मुश्किल कार्य और वक्त को अपनी ताकत बना लिया।
     जो लोग उन्हें दूर से देखते हैं, वे शायद उनकी इस प्रक्रिया को न समझ पाएं। लेकिन जो लोग उनके करीब हैं, वे जानते हैं कि उनका हर निर्णय अद्भुत  होता है।
    हर कठिनाई एक नई संभावना का मार्ग खोलती है। बस उसे तराशने की दृष्टि होनी चाहिए। मेरे पथदृष्टा को जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं, 🎉 🎉 🎉 आप शतायु हों।