किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग जिला छिन्दवाड़ा की प्राकृतिक खेती की थीम पर आधारित झांकी को मिला प्रथम पुरूस्कार

छिंदवाड़ा। माननीय प्रधानमंत्री एवं माननीय मुख्यमंत्री जी के सपनों को साकार करती, कृषि विभाग की झांकी जिसमे प्राकृतिक खेती पर्यावरण, मृदा स्वास्थ्य एवं जनस्वास्थ्य के लिए वरदान मानी जा रही है, प्राकृतिक खेती का बहुत ही सजीव चित्रण सुन्दर ढंग से प्रस्तुत किया जा रहा हैं। एक देशी गाय से 30 एकड मे प्राकृतिक खेती की जाकर खेती को लाभ का धंधा बनाकर किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ बनाया जा सकता है। कृषि विभाग की इस झांकी में वर्तमान समय की आवश्यकता प्राकृतिक खेती जिसके द्वारा जहर मुक्त अनाज, सब्जियाँ स्वस्थ पर्यावरण एवं स्वस्थ धरा की परिकल्पना का चित्रण किया गया हैं। जैविक उत्पादों का युवाओं एवं स्व सहायता समूहों के माध्यम से विक्रय किया जाकर उचित लाभ प्राप्त किया जा रहा हैं।
बढती जनसंख्या एवं खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाने को दृष्टिगत रखते हुए प्रारंभ की गई हरितकृन्ति से रसायनिक उर्वरक एवं कीटनाशकों का असंतुलित उपयोग भी हुआ, जिससे कैंसर जैसी घातक बीमारी जन सामान्य में बढ़ती जा रही है। परिणाम स्वरूप कई राज्यों मे मरीजो के लिए कैंसर ट्रेन तक चलानी पड रही हैं, इससे निजात पाने का एक मात्र उपय प्राकृतिक खेती हैं।
झांकी में रसायनों के अधाधुंध उपयोग से सूक्ष्म जीवों के साथ साथ किसानों का परम मित्र एवं धरती का सच्चा दोस्त केंचुआ भी विलुप्त होता जा रहा हैं। अब केंचुआ भी स्वयं यह पुकार कर रहा है कि प्राकृतिक खेती ही मेरे जीवन को बचा सकती हैं।
झांकी में जिले के आदिवासी अंचल के किसानों द्वारा प्राकृतिक कृषि से खुशहाली का प्रतीक गायन एवं नृत्य प्रस्तुत करते हुए दिखाई दे रहा हैं।
छिन्दवाड़ा जिले का प्राकृतिक खेती में मध्यप्रदेश में प्रथम स्थान का गौरव प्राप्त है। प्राकृतिक खेती से किसानो की लागत मे कमी लाकर जहाँ खेती को लाभ का धंधा बनाया जा सकता है वही पर्यावरण, मृदा स्वास्थ्य एवं जनस्वास्थ्य के लिए वरदान साबित हो सकती हैं। प्राकृतिक खेती के प्रमुख स्त्रोत बीजामृत एवं जीवामृत प्रमुख घटक है।
झांकी में प्राकृतिक उत्पादों सभी प्रकार की सब्जियाँ / फल व अनाज का युवाओं के माध्यम से उचित मूल्य प्रदान किया जा रहा है का प्रदर्शन भी किया जा रहा हैं। साथ ही प्राकृतिक खेती से श्रीअन्न (मिलेट्स) के उत्पादन को दिखाई गया है, जो मानव स्वास्थ्य हेतु संतुलित भोजन के लिए वरदान साबित है।
झांकी के अंतिम में नरवाई प्रबंधन के उन्नत कृषि यंत्रों का प्रदर्शन जिसमें सुपर सीडर / हैप्पी सीडर का प्रदर्शन दिखाया जा रहा है, माननीय कलेक्टर महोदय के नेतृत्व में छिंदवाडा जिले में नरवाई प्रबंधन में किये गये सर्वश्रेष्ठ कार्य को शासन स्तर से प्रशंसा कर सम्मानित किया गया हैं। जिले में इस वर्ष लगभग 10000 एकड में नरवाई प्रबंधन कर सीधे बोनी की गई हैं। नरवाई जलाने की घटनाओं में 75 प्रतिशत तक कमी आई हैं। नरवाई प्रबंधन प्राकृतिक खेती का प्रमुख स्त्रोत है, जिससे मिट्टी की उर्वरक शक्ती बढ़ती हैं। प्राकृतिक खादो के स्प्रे हेतु आधुनिक तकनीकी युक्त बुम स्प्रेयर के माध्यम से कम लागत मे सुगमता पूर्वक छिडकाव किया जा सकता है।
खेती में नई तकनीक ड्रोन का भी प्रदर्शन दिखाया जा रहा है। इस प्रकार शासन की मंशानुसार कृषकों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए कृषको के साथ-साथ आत्म निर्भर भारत की दिशा मे एक महत्वपूर्ण कडी साबित होगी, कृषि विभाग की झांकी द्वारा जीवंत प्रदर्शन किया जा रहा है।