छिंदवाड़ा। नाबार्ड द्वारा जिले में कृषि क्लिनिक और कृषि व्यवसाय केंद्र (एसीएबीसी) योजना के प्रचार-प्रसार के लिये गत दिवस स्थानीय होटल सिल्वर शाईन में कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में डीडीएम नाबार्ड छिंदवाड़ा श्रीमती श्वेता सिंह, एलडीएम छिंदवाड़ा श्री अजय कुमार, उप प्रबन्धक एनसीडीईएक्स श्री पुरुषार्थ प्रताप सिंह, जिला अभियंत्री विभाग श्री समीर पटेल, एडीए कृषि विभाग सुश्री सरिता सिंह, आत्मा विभाग की सुश्री प्राची, जिले के मुख्य बैंक जैसे एसबीआई, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और एचडीएफसी के प्रतिनिधि, एफपीओ के बोर्ड ऑफ डाइरेक्टर और सीईओ उपस्थित थे।

       कार्यशाला में (एसीएबीसी) योजना का प्रचार एवं जागरूकता तथा बैंकरों और एफपीओ सदस्यों के बीच ऋण संबंधी मुद्दों पर चर्चा हुई। डीडीएम नाबार्ड छिंदवाड़ा श्रीमती सिंह ने बताया की कृषि क्लिनिक और कृषि व्यवसाय केंद्र (एसीएबीसी) योजना का उद्देश्य कृषि स्नातकों, डिप्लोमा  धारकों और कृषि पेशेवरों को कृषि आधारित व्यवसाय स्थापित करने के लिए सहायता प्रदान करना है। चूंकि एफपीओ में सीईओ कृषि एवं संबद्ध विषयों में स्नातक होते है व एफपीओ सीधा किसानों से जुड़ा रहता है। कार्यशाला में एफपीओ के सीईओ को इस योजना का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। साथ ही एफपीओ के डाइरेक्टर्स से योजना के प्रचार-प्रसार के लिए अनुरोध किया गया। यह योजना का लाभ कृषि एवं संबद्ध विषयों में स्नातक, कृषि में कम से कम 50 प्रतिशत पाठ्यक्रम पूरा कर चुके डिप्लोमा धारक, कृषि और संबंधित क्षेत्रों में स्नातकोत्तर व्यक्ति और समूह जो कृषि व्यवसाय स्थापित करना चाहते हैं, ले सकते है।

        आवेदन करने से पहले सभी इच्छुक उम्मीदवारों को राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान द्वारा अनुमोदित केंद्र में दो महीने का अनिवार्य प्रशिक्षण लेना आवश्यक है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, उम्मीदवार अपने व्यवसाय को स्थापित करने व वित्तीय सहायता के लिये बैंक में आवेदन कर सकते हैं। बैंक को विस्तृत व्यावसायिक प्रस्ताव के साथ ऋण आवेदन प्रस्तुत करना आवश्यक है। योजना के तहत सब्सिडी इस प्रकार है कि महिलाओं, अनुसूचित जाति/जनजाति (एससी/एसटी) और पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी राज्यों के उम्मीदवारों के लिए परियोजना लागत का 44 प्रतिशत, अन्य सभी के लिए परियोजना लागत का 36 प्रतिशत सब्सिडी बैंक-एंडेड होती है और ऋण पुनर्भुगतान से जुड़ी होती है।

       कार्यशाला में बैंकरों और एफपीओ सदस्यों के बीच ऋण संबंधी मुद्दों पर भी चर्चा हुई, जिनमें मुख्य है ऋण प्राप्त करने के लिए संपार्श्विक की कठिनाइयाँ, ऋण आवेदन प्रक्रिया में देरी। एलडीएम छिंदवाड़ा श्री अजय कुमार ने एफपीओ को अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने और  पारदर्शिता बनाए रखने की सलाह दी । नाबार्ड की क्रेडिट गारंटी योजना का लाभ उठाने पर जोर दिया गया। एफपीओ सदस्यों के लिए वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता बताई गई।