कृषि अनुसंधान केंद्र में चल रहे अलसी अनुसंधान एवं विकास के कार्यो की मॉनिटरिंग की गई

सागर। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र भोपाल रोड़ सागर में वर्ष संचालित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा वित्तपोषित अखिल भारतीय समन्वित अलसी अनुसंधान परियोजना में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद के वैज्ञानिकों की टीम जिसमे डॉ जवाहरलाल ऐवम डॉ दिव्या अंबाती वरिष्ठ वैज्ञानिको ने दिनांक फरबरी 4-5 को परियोजना में चल रहे अलसी अनुसंधान ऐवम विकास के कार्यो की मॉनिटरिंग की । किसानों के खेत मे भ्रमण कर सीड हब परियोजना के बीज किसानों के द्वारा किसानों के लिए लगाये गए बीज उत्पादन एवं अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन के कार्यो की समीक्षा ऐवम संवाद किया।
उल्लेखनीय है कि सागर में संचालित अलसी परियोजना देश मे अलसी अनुसंधान एवं विकास के कार्यो में विगत 10 सालों से अग्रणी भूमिका में है एवं भारत सरकार द्वारा केंद्र में पदस्थ वैज्ञानिक एवं परियोजना प्रभारी को अनुसंधान नवीन प्रजातियों के विकास, नवाचार, एवं बीज उत्पादन के विभिन्न आयामो में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हेतु देश मे बेस्ट तिलहन परियोजना से सम्मानित किया गया। हाल ही में इस अनुसंधान केंद्र के द्वारा अलसी की 3 उन्नत प्रजातियो जिनमे JLS 121, JLS 122 एवं JLS 133 को भारत सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया जो कि अधिक उत्पादन 13-15 कुन्तल असिंचित एवं 15-17 कुन्तल सिंचित अवस्था के साथ साथ अधिक तेलांश (41 -43 %) एवं ओमेगा 3 (56 से 58%) वाली प्रजातीया है जिनका औधोगिक महत्व है एवं किसानों को बीज के साथ साथ परिष्करण उतरान्त उच्च गुणवत्ता का रेशा (लेनिन) एवं अन्य मूल्यसंवर्धित उत्पादों को बनाने में प्रमुख घटक के रूप में उपयोगी है जिससे किसानों को अतिरिक्त लाभ अर्जित करने में मदद मिलेगी। डॉ देवेंद्र पयासी, वैज्ञानिक परियोजना प्रभारी विगत 12 सालों से अलसी अनुसंधान ऐवम आम किसानों तक इसके लाभ को उपलब्ध कराने हेतु प्रयासरत है ऐवम अब तक 8 प्रजातियां विकसित की है जो कि प्रदेश सहित देश के अन्य पड़ोसी राज्यो में बहुत लोकप्रिय हुई है। डॉ आर .के. सराफ, प्रमुख वैज्ञानिक एवं केंद्र प्रभारी परियोजना की इस अभूतपूर्व उपलब्धि हेतु केंद्र के वैज्ञानिकों को बधाई एवं भविष्य में इसी लगन और मेहनत से अनुसंधान एवं विकास हेतु शुभकामनाएं प्रेषित की।