भोपाल l कुछ पुलिस अधिकारी ऐसे होते हैं, जो अपने काम की दम पर अपनी एक अलग छवि बना लेते हैं । जिन्हें देखकर आमजन के मन में सुरक्षा और व्यवस्था के प्रति एक विश्वास बना रहता है । जिनकी सक्रिय, निष्पक्ष ,सहज और सरल कार्य शैली आमजन के बीच हमेशा चर्चा का विषय बनी रहती है । जिनका सकारात्मक व्यक्तित्व पुलिस की छवि को समाज के सामने एक अलग पहचान देता है.... जी हां हम बात कर रहे हैं टी टी नगर क्षेत्र की सहायक पुलिस आयुक्त एसीपी अंकिता खातरकर की जो सिर्फ कुर्सी पर बैठकर आदेश नहीं देती बल्कि लोगों के बीच सड़क पर उतरकर संवाद करती हैं ,हालात समझती हैं और फिर समस्या का समाधान तुरंत करने का प्रयास करती हैं । भोपाल का टी टी नगर क्षेत्र राजधानी का वीवीआईपी क्षेत्र होने के साथ-साथ सबसे व्यस्ततम क्षेत्र भी माना जाता है। जहां गलती की कोई गुंजाइश नहीं होती । इस क्षेत्र में बतौर सहायक पुलिस आयुक्त कार्य करते हुए अंकिता खातरकर ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है । उनकी कार्यशैली से जहां एक और गुंडे, बदमाशों में भय है वहीं दूसरी ओर आमजन के मन में पुलिस के प्रति अटूट विश्वास है । वरिष्ठ पत्रकार तेजेंद्र भार्गव ने एसीपी अंकिता खातरकर से लंबी चर्चा की प्रस्तुत हैं उस साक्षात्कार के मुख्य अंश...       सवाल - आपकी शिक्षा कहां हुई और आपने पुलिस सेवा को ही क्यों चुना...?
जबाव- मैं बैतूल जिले से हूं और मेरी स्कूली शिक्षा बैतूल जिले से हुई है तत्पश्चात मैंने इंजीनियरिंग बी.ई ,(इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन) में आई ई टी कॉलेज ,देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी इंदौर से की है । कॉलेज के दौरान ही सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू की थी और जिसमें प्रथम प्रयास में ही मेरा एमपीपीएससी में सिलेक्शन हुआ।  पुलिस सेवा अपने आप में एक गौरवान्वित करने वाली सेवा के साथ-साथ जनता की समस्याओं को सुनने और उनका निराकरण करने ,उनको न्याय दिलाने की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देती है। इसलिए मैने पुलिस सेवा को ही चुना l
सवाल- आपके परिवार का बैकग्राउंड क्या है , क्या परिवार से भी कोई पुलिस सर्विस में है..?
जबाव - मैं मध्यम परिवार से बिलॉन्ग करती हूं, मेरे पिताजी सहायक शिक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए  एवं माताजी ग्रहणी है। एक छोटी बहन है जो अभी कॉम्पिटेटिव एग्जाम्स की तैयारी कर रही है। परिवार में मेरे पति और दो बच्चे हैं । मेरे पति भी पुलिस सेवा में ही कार्यरत हैं l 

सवाल- आपके दृष्टिकोण से सफलता का मूल मंत्र क्या है..?
जबाव - सफलता का मूल मंत्र यही है कि समय का सदुपयोग करें, निरंतरता, धैर्य एवं दृढ़  निश्चय के साथ अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए छोटे-छोटे टास्क कंप्लीट करते हुए वहां तक पहुंच जाए। यदि किसी कारणवश असफल होते हैं तो टूटना नहीं है बल्कि और बेहतर तैयारी के साथ मैदान में उतरना है । 
 सवाल -  पुलिस की नौकरी कोई 8-10 घंटे का टास्क नहीं होता बल्कि कभी-कभी तो 24 घंटे भी काम करना पड़ता है यह सब कैसे कर पाती हैं..?
जबाव - आपने बिल्कुल सही कहा कि पुलिस का टास्क कोई 10 घंटे का काम नहीं है या फिक्स टाइम नौकरी नहीं है बल्कि 24 इनटू 7 का काम है और  हमारी पुलिस का स्लोगन ही है देश भक्ति जन सेवा, और यूनिफॉर्म पहनने के बाद यह भाव अपने आप आ जाता है । जो हमें अपने कार्यों के प्रति समर्पित और निष्ठावान बनाता है और साथ ही साथ परिवार का सहयोग ,वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन एवं जनता का विश्वास, जब सबका संयोग  होता है तब काम के घंटे मायने नहीं रखते।
सवाल - बाउंड ओवर की कार्रवाई के बारे में बताइए इससे अपराधों को रोकने में  किस हद तक सफलता मिली है
जबाव - भोपाल में कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद प्रतिबंधात्मक कार्यवाही के अधिकार पुलिस अधिकारियों को प्राप्त हुए हैं , हमारे सहायक पुलिस आयुक्त स्तर पर भी न्यायालयीन प्रक्रिया के पावर मिले हैं जिसमें शांति व्यवस्था भंग करने, बार-बार अपराध कारित करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ बाउंड ओवर की कार्यवाही की जाती है जिससे क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनी रहे एवं अपराधिक गतिविधियों पर लगाम लगे। जिसके परिणाम यह हुए हैं कि अपराधों में भी कमी आई है एवं अपराधों की रोकथाम में काफी हद तक सफलता प्राप्त हुई है। 
सवाल- आप राजधानी के सबसे व्यस्ततम क्षेत्र में काम कर रही हैं, जहां गलती की कोई गुंजाइश नहीं होती l क्या आपको किसी तरह के राजनैतिक हस्तक्षेप का भी सामना करना पड़ता है..?
जबाव - जी आपने बिल्कुल सही कहा मैं एसीपी टीटी नगर के रूप में भोपाल जिले के सबसे व्यस्ततम क्षेत्र में कार्य कर रही हूं ,जो अपने आप में एक चुनौती पूर्ण पदस्थापना है और गलती की गुंजाइश भी नहीं है। जब आप अपने अधीनस्थ स्टाफ के साथ टीमवर्क के रूप में कार्य करते हैं। वरिष्ठ अधिकारियों का समय-समय पर मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं एवं स्टाफ के प्रति संवेदनशील एवं जनता का आप पर विश्वास हो तो काफी हद तक चुनौती पूर्ण कार्य भी आसान लगने लगते हैं एवं गलती की गुंजाइश कम होती है। रही बात राजनीतिक हस्तक्षेप की तो आप अपना कार्य ईमानदारी, पूर्ण निष्ठा, कर्तव्य परायणता के साथ करते हैं ,तो राजनीति से जुड़े लोग भी आपके कार्य को समझने लगते हैं एवं समय-समय पर सहयोग प्रदान करते हैं। अतः अभी तक ऐसे किसी भी हस्तक्षेप का सामना मुझे नहीं करना पड़ा है ।
सवाल - महिला पुलिस अफसर होने के नाते आप आमजन को क्या संदेश देना चाहेंगी..?
जबाव - महिला पुलिस अफसर होने के नाते जनता को यही संदेश देना चाहूंगी कि पुलिस आपकी सहायता एवं सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर है एवं नागरिकों से यही कहना चाहूंगी कि एक ऐसे समाज का निर्माण करें जिसमें महिलाएं, बच्चे अपने आप को सुरक्षित महसूस करें, अपनी नैतिक जिम्मेदारियों को समझे क्योंकि समाज की सुरक्षा सिर्फ पुलिस का जिम्मा नहीं है बल्कि यह एक साझी जिम्मेदारी है। 
साथ ही यह भी कहना चाहूंगी कि किसी प्रकार का अपराध आपके साथ हो, अन्याय हो तत्काल पुलिस को सूचना प्रेषित करें। 
कानून का पालन करें, अफवाहों से बचें , संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तत्काल पुलिस को दे।