अखिल भारतीय समन्वित रबी दलहन परियोजना की वार्षिक समूह बैठक आयोजित
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सीहोर l अखिल भारतीय समन्वित रबी दलहन परियोजना की 29वीं वार्षिक समूह बैठक अमलाहा स्थित एफयूआरपी ईकार्डा में 2 से 4 सितंबर 2024 को आयोजित की गई। बैठक में आधुनिक तकनीक जैसे स्पीड ब्रीडिंग और जीनोम एडिटिंग के उपयोग के बारे में बताया गया। इसके साथ ही भारत में दलहनों के लिए क्षेत्र विशष्ट प्रोडक्ट प्रोफाइल विकसित करने के महत्व को रेखांकित कर देश में दलहन अनुसंधान और विकास को आगे बढ़ाने में ईकार्डा के महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए सुझाव दिया गया।
बैठक में कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग डीएआरई, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की नई रणनीतियों पर चर्चा की, जिसका उद्देश्य भारत में दलहन सीड रिप्लेसमेंट रेट को बढ़ाना है एवं दलहन के उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है। इसके साथ ही किसानों को दलहन उत्पादकता बढ़ाने के लिए समर्थन देने के लिए भारत सरकार की विभिन्न नीतियों पर प्रकाश डाला गया। बैठक में दलहन उत्पादन में हुई महत्वपूर्ण वृद्धि को रेखांकित किया गया एवं इस क्षेत्र में निरंतर सफलता सुनिश्चित करने के लिए सतत सहयोगात्मक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया। इसके साथ ही रबी दलहन फसलों पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (एआईसीआरपी) को सुदृढ़ करने पर बल दिया। बैठक में रबी दलहनों विशेष रूप से चना और मसूर के उत्पादन में उल्लेखनीय अनुसंधान और विकास गतिविधियों का अवलोकन प्रस्तुत किया गया। इस दौरान दलहन अनुसंधान और विकास में हुई प्रगति और उपलब्धियों पर एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई जिससे आगे की समीक्षा और चर्चाओं की नींव रखी गई।
बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान के उपमहानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ तिलक राज शर्मा, कृषि आयुक्त डॉ. प्रवीन कुमार सिंह, , बिरसा कृषि विश्वविद्यालय कुलपति डॉ. सुनील चंद्र दुबे, आईसीएआर के सहायक महानिदेशक (तिलहन एवं दलहन) डॉ. संजीव गुप्ता, ईकार्डा साउथ एशिया एंड चाइना रीजनल प्रोग्राम के रीजनल कोऑर्डिनेटर डॉ. शिव कुमार अग्रवाल, आईसीएआर- आईआईपीआर कानपुर निदेशक डॉ. गिरीश प्रसाद दीक्षित, परियोजना समन्वयक डॉ. शैलेश त्रिपाठी तथा मोरक्को, लेबनॉन, मिस्र और किर्गिज़स्तान से आये कृषि वैज्ञानिकों ने भाग लिया ।