मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की सादगी भरी अनुकरणीय पहल
उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की साधारण और सादगी भरी एक पहल ने मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के तट पर एक नया इतिहास रच दिया है । सामूहिक विवाह समारोह में अपने बेटे का विवाह कर उन्होंने महाकाल की नगरी से पूरे प्रदेश को एक बड़ा संदेश दिया है । संदेश है फिजूल खर्ची रोकने का, संदेश है दिखावा ना करने का। आज के समय में विवाह समारोह, विवाह ना होकर इवेंट बनकर रह गए हैं जिनमें लोग अपनी शक्ति, वैभव, प्रतिष्ठा और आर्थिक सामर्थ्य का प्रदर्शन करते हैं । ऐसे समय में अपने डॉक्टर बेटे का, डॉक्टर इशिता से सामूहिक विवाह समारोह में विवाह कराना निसंदेह समाज के सामने एक बड़ा उदाहरण पेश करना है। उम्मीद है कि पार्षद से लेकर विधायक और मंत्री तक तथा संगठन में प्रदेश से लेकर जिला और नगर मंडल तक कार्यकर्ता भी अब ऐसी ही शुरुआत कर समाज को कर्जभरे खर्च की चकाचौंध से बाहर निकालने का संकल्प लेंगे । जरा आमंत्रण पत्र की कीमत भी जान लीजिए , जी हां ! आमंत्रण पत्र की कीमत है ₹12 उसमें भी मुख्यमंत्री नाम का कहीं जिक्र भी नहीं है, लिखा है मोहन यादव और यादव परिवार । इतना ही नहीं सभी 21 जोड़ों के विवाह का खर्च एवं घर गृहस्थी के सामान की व्यवस्था भी स्वयं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ही कर रहे हैं। साथ ही साथ इस विवाह समारोह में मेहमानों से उपहार ना लाने का भी विनम्रता पूर्वक अनुरोध किया गया है । अगर सगाई की चर्चा करें तो सगाई में भी बेटा और बहू किसी महंगी और बड़ी कार से नहीं बल्कि वे बैलगाड़ी से आए हैं। साधारण, सादगी भरे विवाह समारोह ही नहीं बल्कि निजी जीवन में भी मुख्यमंत्री डॉ यादव ने प्रतिमान स्थापित किए हैं । उनकी पत्नी और बच्चे सीएम हाउस में नहीं रहते हैं। एमबीबीएस के बाद एमएस कर रहा उनका बेटा हॉस्टल में रहता है वहीं उनकी पत्नी पैतृक आवास में ही पूरे परिवार के साथ रहती हैं । वास्तव में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव सोशल रिफॉर्मर हैं। निजी जीवन से लेकर सामूहिक विवाह समारोह में बेटे का विवाह कराने तक उनकी राजनीति सामाजिक सरोकारों से जुड़ी है ,बेजोड़ है। जो अन्य राजनेताओं को उनके जैसी राजनीति करने के लिए भी प्रेरित करती है । वास्तव में सरकार का काम सिर्फ सड़क, बिजली, पानी जैसे विकास कार्य करवाना ही नहीं है बल्कि समाज सुधार करना भी है।



