दिव्य चिंतन 
किस्सा कुर्सी का:

दो जेठ

हरीश मिश्र ( 9584815781)

   आजकल स्वास्थ्य विभाग  , रायसेन का स्वास्थ्य अच्छा नहीं है। अभी ये तो नहीं पता बीमारी क्या है, लेकिन ला-इलाज है।
   मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की कुर्सी के लिए  डॉ दिनेश खत्री और डॉ हरिनारायण मांडरे लड़ रहे हैं। कर्मचारी असमंजस में हैं। लड़ाई मंत्रालय से लेकर हाईकोर्ट तक , ताला लगाने से खोलने तक पहुंच गई है। लड़ाई रोमांचक मोड़ पर है। जैसे स्थानीय परंपरा है कि दीपोत्सव के बाद पड़वा पर पड़ों को लड़ाने के लिए हरिमन बाबा रामलीला मैदान के चबूतरे पर ले जाकर, फूल माला पहनाकर लड़ाई कराई जाती है, ये लड़ाई कभी कभी बहुत रोमांचक हो जाती है।  
    वैसे ही दोनों डॉक्टरों की लड़ाई स्वास्थ्य विभाग में नारायण चबूतरे पर लड़ी जा रही है। रोमांचक मोड़ पर पहुंच गई है।
     सूत्रों के अनुसार डॉ खत्री और डॉ मांडरे ने लक्ष्मी खर्च कर  स्वास्थ्य अधिकारी की कुर्सी लीज पर ली थी, लेकिन कुर्सी लेने से पहले नो-ड्यूज नहीं लिया, इसलिए विवाद चल रहा है।

डॉ खत्री संक्रांति पर्व से पहले पुनः पदस्थ हुए थे। उन्होंने संक्रांति पर्व पर तिल के लड्डुओं का पूरा आनंद लिया भी नहीं था कि बादल मंडराने लगे।डॉ मांडरे बसंत पंचमी के दिन हाईकोर्ट से आदेश ले आए, उनके जीवन में बसंत की बहार आ गई। वह बसंत उत्सव और होलिका उत्सव के रंगों से सराबोर थे कि चैत्र माह में डॉ खत्री हाइकोर्ट से आदेश ले आए कि फसल भले ही मांडरे ने बोई हो चेत वही काटेंगे। डॉ खत्री की फसल खलिहान में ही रखी थी, समर्थन मूल्य केंद्र बारदाने की कमी के कारण तुली भी नहीं थी कि डॉ मांडरे जेठ मास में फिर आदेश ले आए कि इस लाइलाज़ बीमारी का इलाज हम ही करेंगे।

   दो दिन से ये मामला सुर्खियों में है वैसे हिंदू कैलेंडर अनुसार ज्येष्ठ (जेठ) महीना चल रहा है। इस साल अधिकमास (मलमास) के कारण जेठ मास 30 दिनों का नहीं, बल्कि लगभग 60 दिनों का होगा।

   इसलिए दोनों डॉ की लड़ाई का समाधान ये हो सकता है कि जब गठबंधन सरकारें छह-छह महीने में मुख्यमंत्री बदल सकती हैं, तो रायसेन में एक-एक महीने के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी क्यों नहीं हो सकते ? आधा जेठ डॉ. खत्री संभाल लें, आधा डॉ. मांडरे! जनता को कम से कम यह संतोष तो रहेगा कि इलाज बारी-बारी से सही, हो तो रहा है।

लेखक ( स्वतंत्र पत्रकार)