मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस की अनुकरणीय पहल
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस द्वारकाधीश बंसल का साइकिल चलाकर कोर्ट जाना एक अच्छा संदेश देता है।
राजेंद्र सिंह जादौन
आज जब हर छोटी दूरी के लिए भी लोग गाड़ी निकाल लेते हैं, ऐसे में एक वरिष्ठ जज का साइकिल से निकलना सिर्फ पेट्रोल बचाने की बात नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, अनुशासन और सादगी का भी संदेश है। पीछे अर्दली फाइलों के साथ साइकिल पर और सुरक्षा में दरोगा जी बाइक से चलते दिखाई दिए तो दृश्य थोड़ा अलग जरूर लगा, लेकिन यही तस्वीर बताती है कि बदलाव ऊपर से शुरू होता है।
प्रधानमंत्री की “पेट्रोल बचाओ” और फिट इंडिया जैसी अपीलों को अगर जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अपने जीवन में उतारें, तो उसका असर समाज पर भी पड़ता है। आम आदमी भाषण कम और उदाहरण ज्यादा देखता है।
सबसे अच्छी बात यह है कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी संभालने वाले व्यक्ति ने यह दिखाया कि पद बड़ा होने से सादगी छोटी नहीं हो जाती। कोर्ट की गंभीर जिम्मेदारियों के बीच भी स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति जागरूक रहना एक सकारात्मक सोच है।
हाँ, बेचारे अर्दली की हालत देखकर यह जरूर लगा कि फिटनेस अभियान में उसकी परीक्षा थोड़ी ज्यादा हो गई। लेकिन तस्वीर में एक मानवीय और प्रेरणादायक पक्ष भी है पूरा स्टाफ अपने अधिकारी के साथ उसी ऊर्जा में चल रहा है।
ऐसी छोटी-छोटी पहलें ही समाज में बड़ा संदेश देती हैं कि बदलाव केवल नीतियों से नहीं, आदतों से आता है। आज साइकिल है, कल शायद लोग छोटी दूरी पैदल चलने या सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए भी प्रेरित हों।
कम से कम इस दृश्य ने यह तो साबित कर दिया कि सरकारी व्यवस्था में अभी भी कुछ लोग ऐसे हैं जो सिर्फ सलाह नहीं देते, खुद उदाहरण भी बनते हैं।


