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जावेद अख्तर—शब्दों के वही शिल्पकार, जो कभी मोहब्बत के गीत लिखते हैं, तो कभी बग़ावत का उद्घोष करते हैं। उनका ज़ुबां केवल सौंदर्यबोध नहीं, साहस का उद्घोष भी है। ईमान की बात  कहने में  जोखिम है, लेकिन ये जोखिम उठाते हैं, आतंक की आंखों में आंख डालकर आईना दिखाने का हौसला है उनके पास। जिम्मेदारियां पूरी निर्भीकता से निभाते हैं।
    इसी कारण 26 फ़रवरी 2023 को लिखा गया यह दिव्य चिंतन आज फिर उतना ही प्रासंगिक है। पुनः पढ़ें -

दिव्य चिंतन

अजीब आदमी है, कभी 
मोहब्ब्त का गीत लिखते हैं तो कभी बग़ावत का राग सुनाते हैं...

हरीश मिश्र 

       जावेद अख्तर-कवि , हिन्दी फिल्मों के गीतकार और पटकथा लेखक हैं।  कहानी, पटकथा और संवाद लिखने और मंचों पर खरी- खोटी सुनाने के लिए चर्चा/ विवाद में रहते  हैं। 

      अजीब आदमी है, कभी मोहब्ब्त का गीत लिखते हैं तो कभी बग़ावत का राग सुनाते हैं...कभी फूल से महकते हैं तो .कभी आग का शोला बन जाते हैं...कभी नापाक ज़मीं ( पाकिस्तान ) पर... नापाक हरकत का मुंह तोड़ जबाव देते हैं। 

    "...सांसों का रूक जाना ही मृत्यु नहीं है। वह व्यक्ति भी मरा हुआ ही है जिसने गलत को गलत कहने की नैतिकता खो दी है।

 लेखक - ( स्वतंत्र पत्रकार)
स्वरदूत क्रमांक ९५८४८१५७८१