#अग्नि_परीक्षा_परीक्षा 
#और_भविष्य_से_खिलवाड़ 

हरीश मिश्र

रायसेन l आज अग्नि परीक्षा का शुभ मुहूर्त है।
बारातें सज रही हैं। बैंड की धुन पर कदम थिरक रहे हैं। दो दिल एक होने जा रहे हैं। शोर है, जश्न है, रोशनी है, उल्लास है।

उधर दूसरी ओर...
बच्चों की वार्षिक परीक्षा चल रही है।
कोरी कॉपी पर भविष्य की काल-गणना लिखी जा रही है। एक-एक अंक के साथ जिंदगी के सपने जुड़े हैं। किसी के लिए यह केवल परीक्षा है,पर बच्चों के लिए यही जीवन की दिशा तय करने वाला मोड़।
    एक ओर वैवाहिक अग्नि की परीक्षा है,
दूसरी ओर जीवन की परीक्षा ।
ना अग्नि परीक्षा रुक सकती है,
ना वार्षिक परीक्षा टल सकती है।
पर क्या शोर थोड़ा संयमित नहीं हो सकता?
उत्सव संस्कृति का हिस्सा है,पर संयम भी सभ्यता की पहचान है।

प्रशासन ने ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर सीमा तय की है। क्या हुआ उस आदेश का ?